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फेल ट्रांजेक्शन के 9 साल पुराने मामले में बैंक को लौटाने होंगे 3.28 लाख रुपए ….

जेडी न्यूज विजन….

०ATM ट्रांजेक्शन हुई फेल, फिर भी अकाउंट से कट गए 10 हजार…

सूरत की एक कंज्यूमर कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा को 3.28 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं. नौ साल तक 10 हजार रुपये का ATM विड्रॉल फेल हो गया था. इसमें बैंक अकाउंट से पैसे कट गए थे।

बैंक ने वो पैसे वापस जमा नहीं करवाए. अदालत ने यह माना कि बैंक सफल ट्रांज़ैक्शन का कोई सबूत नहीं दे पाया.
कोर्ट ने पाया कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने लिखित शिकायत और कानूनी नोटिस मिलने के बाद भी इस मुद्दे को हल करने में नाकाम रहा. अदालत ने यह फैसला दिया कि बैंक, SBI की और से CCTV फुटेज शेयर न करने की बात को अपने बचाव के तौर पर पेश नहीं कर सकता. अदालत ने टिप्पणी की है कि ग्राहक का इससे कोई लेना-देना नहीं है. बैंक ऑफ बड़ौदा का फ़र्ज़ था कि वह सबूतों के साथ पैसे निकाले जाने की बात साबित करे.
ये है पूरा मामला
घटना दिन 18 फरवरी, 2017 और जगह सूरत के उधना इलाके की है. यहां रहने वाले एक बैंक ऑफ बड़ौदा के कस्टमर ने एसबीआई (SBI) के एटीएम से 10 हजार रुपये निकालने चाहे. एटीएम से पैसे नहीं निकले. लेकिन उनके खाते से 10 हजार रुपये कट गए. यह एक ‘फेल ट्रांजैक्शन’ था.
बैंक की लापरवाही
आरबीआई (RBI) के नियमों के अनुसार, फेल ट्रांजैक्शन का पैसा 5 दिनों में कस्टमर के खाते में वापस आ जाना चाहिए. कस्टमर ने 21 फरवरी 2017 को अपनी बैंक ब्रांच में लिखित शिकायत की. मार्च से मई तक कई ईमेल भेजे. लेकिन बैंक ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की.
बैंक से मदद न मिलने पर कस्टमर ने एसबीआई में आरटीआई (RTI) दाखिल की. सीसीटीवी फुटेज की मांग की. लेकिन वहां से भी निराशा ही हाथ लगी. अंत में थक-हारकर कस्टमर ने दिसंबर 2017 में सूरत कंज्यूमर फोरम में मामला दर्ज कराया.
बैंक की दलील और कोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा ने तर्क दिया कि ट्रांजैक्शन एसबीआई के एटीएम में हुआ था. इसलिए उनकी जिम्मेदारी नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया. साफ किया कि अपने कस्टमर को सेवा देना और सफल ट्रांजैक्शन का सबूत देना बैंक की जिम्मेदारी है.
कोर्ट ने आरबीआई के 2019 के सर्कुलर का हवाला दिया. इसमें प्रावधान है कि फेल ट्रांजैक्शन के 5 दिन बाद से प्रतिदिन 100 रुपये का मुआवजा देना होगा.
मुआवजे का गणित

18 फरवरी 2017 से 26 फरवरी 2026 तक कुल 3288 दिन का विलंब हुआ.

100 रुपये के हिसाब से कुल 3,28,800 रुपये का मुआवजा बना.

कोर्ट ने बैंक को मूल राशि जो कि 10 हजार रुपये और उस पर 9% ब्याज चुकाने का भी आदेश दिया.

बैंक को यह पूरी राशि 30 दिनों के अंदर-अंदर चुकाने का आदेश दिया गया है. यदि बैंक भुगतान में और देरी करता है, तो यह राशि 3 लाख 31 हजार 500 रुपये से भी ऊपर जा सकती है।

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