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…टल सकता है यूपी पंचायत चुनाव, पंचायतों में बैठाए जाएंगे प्रशासक, फाइनल वोटर लिस्ट की तारीख बढ़ी…
लखनऊ: : यूपी पंचायत चुनाव की तैयारी में लगे उम्मीदवारों को झटका लगा है। निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख एक बार फिर बढ़ा दी है।
अब अंतिम सूची 22 अप्रैल को जारी होगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां पूरी न होने के कारण फिर तारीख बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। फिलहाल, पंचायत चुनाव टलना तय माना जा रहा है। ऐसे में अगले महीने पंचायतों में प्रशासक बैठा दिए जाएंगे।
संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 21 अप्रैल तक मतदाता सूचियों का कंप्यूटरीकरण, मतदेय स्थलों की मैपिंग, वार्डों का क्रमांकन और फोटो प्रतियां तैयार करने का काम पूरा किया जाएगा। इसके बाद 22 अप्रैल को अंतिम सूची प्रकाशित होगी। इसके पहले 15 अप्रैल को अंतिम सूची का प्रकाशन होना था। कागजी कार्रवाई पूरा न होने की वजह से समयावधि बढ़ाई गई है। मालूम हो कि 23 दिसंबर 2025 में आयोग ने पुनरीक्षण की अनंतिम सूची जारी की थी।
यूपी से मिलीं लाखों आपत्तियां
अनंतिम सूची में 12.69 करोड़ मतदाता दर्ज थे, जो पिछले चुनाव के मुकाबले 40.19 लाख अधिक हैं। इस पर आयोग ने दावे और आपंत्तियां मांगे थे। प्रदेश भर से लाखों आपत्तियां मिलीं। जिसका आयोग ने सुनवाई कर निस्तारण किया। अब जबकि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होगा तब मतदाताओं की वास्तविक बढ़ोतरी की संख्या और कुल मतदाताओं का पता चलेगा। फिलहाल, इससे पहले 15 जनवरी और फिर 15 अप्रैल को इसे जारी किया जाना था। अब फिर तारीख बढ़ा दी गई है। उधर, अभी तक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का भी गठन नहीं हुआ है । 26 मई को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होगा। अब पंचायत चुनाव होना मुश्किल है। अब पंचायतों में प्रशासक बैठा दिए जाएंगे।
पंचायत चुनाव समय से कराने की प्रधानों ने उठाई आवाज
अयोध्या अखिल भारतीय प्रधान संगठन की जिला कार्यकारिणी की नगर के सिविल लाइन स्थित एक होटल में बैठक हुई। इसमें आगामी पंचायत चुनाव की वर्तमान परिस्थितियों पर चर्चा की गई और समय से चुनाव कराने की मांग की गई। प्रधानों ने समय से चुनाव न कराने पर कार्यकाल बढ़ाने की मांग की। बैठक में जिलाध्यक्ष राजेश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रधानों नक निर्णय लिया है कि समय से पंचायत चुनाव कराना सरकार एवं चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, क्योंकि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश समय पर चुनाव नहीं हो पाते हैं तो सरकार को प्रधानों का कार्यकाल कम से कम एक वर्ष के लिए बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकाल बढ़ाने में कोई संवैधानिक बाधा आती है तो वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया जाए।
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