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लखनऊ : : यहां पर एक भव्य कार्यक्रम में प्रदेश भर के आर्य जनों ने आर्य जगत के सुप्रसिद्ध संन्यासी और क्रांतिकारी संत आचार्य स्वदेश जी को आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष चुन लिया। यह नियुक्ति सेवानिवृत न्यायाधीश की उपस्थिति में संपन्न हुई। जिसके लिए दो पर्यवेक्षक भी कोर्ट के द्वारा नियुक्त किए गए थे। दोनों पर्यवेक्षकों की उपस्थित भी कार्यक्रम में निरंतर बनी रही। स्पष्ट है कि यह नियुक्ति चुनाव को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए की गई थी ताकि चुनाव पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न हो सके। प्रदेश के विभिन्न जनपदों से उपस्थित हुए मतदाताओं और आर्यजनों ने सर्वसम्मति से आचार्य स्वदेश जी को अपना अध्यक्ष स्वीकार किया। जैसे ही स्वामी जी के नाम का प्रस्ताव रखा गया सभी लोगों ने हाथ खड़े करके और अपने स्थान पर खड़े होकर अपनी प्रसन्नता और सहमति का प्रदर्शन किया।
नवनियुक्त अध्यक्ष ने दिया शानदार भाषण
अपनी नियुक्ति के उपरांत नए अध्यक्ष आचार्य स्वदेश जी ने अपना शानदार भाषण दिया। अपने चुनाव के पश्चात अध्यक्ष भाषण देते हुए आचार्य श्री ने कहा कि आर्य समाज एक क्रांतिकारी संगठन है । जिसने भारत के स्वाधीनता आंदोलन में बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि अनेक क्रांतिकारियों ने आर्य समाज के गुरुकुलों में देशभक्ति का पाठ पढ़ा और विदेशी सत्ता को भारत भूमि से बाहर खदेड़ने के लिए अपने आप को सहर्ष समर्पित कर दिया। उनका वह त्याग और बलिदान का भाव आज भी हमारा मार्गदर्शन करता है । महर्षि दयानंद जी महाराज ने अपना जीवन अपने गुरु ब्रजानंद जी के आदेश से देश सेवा और वैदिक धर्म की सेवा के लिए समर्पित किया। उनकी उस पुण्य प्रेरणा से अनेक आर्यजनों ने इस रास्ते का अनुगमन किया, लेकिन कुछ स्वार्थी तत्वों ने स्वामी जी की इस पवित्र भावना के विपरीत आचरण करते हुए आर्य समाज की संस्थाओं पर अवैधानिक और अनैतिक कब्जे करने की प्रवृत्ति अपना ली। जिससे भूमाफिया और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग संगठन में प्रवेश करने और अपनी मनमानी करने पर आ गए।
आपराधिक लोगों से मुक्ति पानी होगी
जिसका परिणाम यह हुआ कि संगठन को अपना विस्तार करने में विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ा। संगठन के भीतर जिस व्यापकता का विस्तार होना चाहिए था, वह बाधित हो गई। आज आर्य समाज को अपने व्यापक विस्तार की आवश्यकता है। इसलिए ऐसे सभी असामाजिक लोगों से मुक्ति पाना समय की आवश्यकता है, जो किसी न किसी प्रकार से संगठनों के विशेष पदों का दायित्व निभाते हुए संगठन का अहित करते रहे हैं। स्वार्थी पदलोलुप और भ्रष्ट लोगों को सत्ता से दूर खींच कर फेंकना महर्षि दयानंद जी का आदर्श सपना था। जिसे पूर्ण करना प्रत्येक आर्य समाजी का कर्तव्य है। यदि आज भी इसी प्रकार के लोग संगठन के पदों पर विराजमान रहे तो स्वामी जी का आर्यावर्त बनाने का सपना कभी पूर्ण नहीं हो पाएगा।
उन्होंने कहा कि हमें मनुस्मृति के आधार पर संगठन और देश की राजनीति का सुधार करना है।

अभाव कभी बाधा नहीं बन सकते
आचार्य श्री ने अपने उत्कृष्ट भाषण में उपस्थित आर्यजनों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि यदि किसी भी प्रकार के अभाव हमारे मार्ग में आ रहे हैं तो उनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रभु इच्छा को सर्वोपरि मानकर अपने आपको नए संकल्प के साथ लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समर्पित कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब संकल्प लेकर हम अपने ध्येय पथ पर आगे बढ़ने लगते हैं तो साधन अपने आप बनने लगते हैं। समझना चाहिए कि परमपिता परमेश्वर की शक्ति हमारा मार्गदर्शन कर रही है। उस शक्ति को नमन करते हुए हमें कार्य के प्रति पूर्ण निष्ठा रखते हुए समर क्षेत्र में कूद जाना चाहिए। एक दिन समय आएगा जब हम देखेंगे की सफलता हमारे कदम चूम रही होगी लेकिन उस प्रकार के आनंद के क्षणों की प्राप्ति के लिए पहले संघर्ष तो करना ही पड़ता है।
अपने इस लक्ष्य की प्राप्ति में जितने भर भी लोग मार्ग में हमारे सहायक के रूप में हमको मिलें उन सब के प्रति कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए, परंतु कभी भी इस बात को लेकर निराश नहीं होना चाहिए कि हम अकेले हैं। आप अकेले नहीं हैं, जब आप आगे बढ़ेंगे तो अनेक हाथ आपके साथ के लिए उठाएंगे।
नई जिम्मेदारी के निहित अर्थ
आचार्य श्री ने अपनी नई जिम्मेदारी के निहित अर्थों को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस जिम्मेदारी को लेने का उनका केवल एक ही भाव है कि आर्य संस्थाओं का सफाई अभियान चलाया जाए। अवैधानिक और अनैतिक कार्य करने वाले लोगों को संगठनों से बाहर का रास्ता दिखाया जाए। आर्य समाज जिस प्रकार की नैतिकता को लेकर समाज के मार्गदर्शक के रूप में रणक्षेत्र में उतरा था, उसकी वही पहचान कायम होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि इस अभियान में आप सभी आर्यजनों का सहयोग अपेक्षित है। मेरा मानना यह भी है कि यह सहयोग बहुत ही शुद्ध भावना से दिया जाए। क्योंकि यह एक नई क्रांति का समय है। उस क्रांति के लिए हम सबको उठ खड़ा होना चाहिए। इसमें आप सभी की सहभागिता अनिवार्य है। यदि हमारे भीतर महर्षि दयानंद जी के प्रति निष्ठा और श्रद्धा है तो हमें अपने नए लक्ष्य के लिए निरंतर साधना करनी होगी। आज किसी भी दृष्टिकोण से नई चुनौतियों से मुंह फेरने की आवश्यकता नहीं है बल्कि इन चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए अपने आप को प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। वैदिक धर्म के उदात्त और पवित्र सिद्धांतों को स्थापित करने की आवश्यकता है । लोगों को यह बताने की आवश्यकता है कि यदि संसार में वास्तविक अर्थों में शांति स्थापित करनी है तो वह केवल महर्षि दयानंद जी के सपनों का भारत बनाने से ही संभव है।
हमको उगाना है नया सूरज: आचार्य पंकज
इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन कर रहे आचार्य पंकज कुमार ने कहा कि आर्य समाज ने कभी चुनौतियों से भागना नहीं सीखा है बल्कि उसने चुनौतियों का सामना करते हुए अपने आप को एक समाधान के रूप में प्रस्तुत करते हुए इतिहास लिखने की अनोखी परंपरा का निर्वाह किया है। आज भी राष्ट्र, समाज और वैदिक धर्म के सामने अनेक प्रकार की चुनौतियां हैं, परंतु हम सब मिलकर नया सूरज उगाने का काम करेंगे। पूज्य स्वामी जी के नेतृत्व में हम आगे बढ़ेंगे और देश को यह आभास कराएंगे की महर्षि दयानंद जी के सपनों का भारत बनाने के लिए आर्य समाज क्रांति के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि क्रांति के लिए तप और त्याग की आवश्यकता होती है और इन दोनों में आर्य समाज के त्यागी तपस्वी लोगों ने कभी प्रमाद नहीं किया है। आज भी आर्य समाज के पास वह ऊर्जा है जो इसी मार्ग का अनुगमन करते हुए राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है। हमें अपनी ऊर्जा का सदुपयोग करना है और उसे सही दिशा देकर राष्ट्र निर्माण में जुट जाना है। उन्होंने उपस्थित लोगों का आवाहन किया कि वे सभी संगठन की शक्ति को और अधिक बलशाली बनाने के लिए वर्तमान नेतृत्व का साथ देने के लिए अपने आप को प्रस्तुत करें। आज हम नए सवेरे में प्रवेश कर रहे हैं, जिसके शुभ परिणाम आने निश्चित हैं।
दिवंगत आर्यजनों को किया गया स्मरण
इस अवसर पर संगठन के महामंत्री श्री दयाशंकर आर्य ने विगत वर्षों में दिवंगत हुए आर्यजनों को स्मरण किया और उनके प्रति संगठन की ओर से गहन संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिन आर्यजनों ने अपने जीवन काल में संगठन, समाज और राष्ट्र के लिए विशेष कार्य किया उनका जीवन हमारे लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि जो संगठन अपने पूर्वजों का सम्मान नहीं कर पाता है वह मिट जाता है। हमें अपने पूर्वजों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्पद जीवन से अवश्य ही शिक्षा लेनी चाहिए।
आर्योदय पत्रिका का किया गया विमोचन
जनपद गौतम बुद्ध नगर में बने जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को लेकर 11 अप्रैल को आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के सौजन्य से ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। जिसमें उपरोक्त हवाई अड्डे का नाम महर्षि दयानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखने की मांग उठाई गई। इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने बताया कि कार्यक्रम में सैकड़ो आर्य समाजों के संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं और अन्य सामाजिक संगठनों की ओर से समर्थन पत्र प्रस्तुत हुए। जिसे लेकर इस पत्रिका का विशेषांक के रूप में प्रकाशन किया गया है। जिसमें देश-विदेश की उन सभी आर्यसमाजों का उल्लेख किया गया है, जिन्होंने अपने समर्थन पत्र आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर को प्रेषित किए थे। आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल इस कार्यक्रम में उपस्थित रहा। जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र सिंह आर्य, ओमवीर सिंह आर्य, विजेंद्र सिंह आर्य, आर्य वीर दल उत्तर प्रदेश के सचिव आर्य वीरेश भाटी, आर्य प्रतिनिधि सभा के उपाध्यक्ष महावीर सिंह आर्य, भाषा प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष ब्रह्मचारी आर्य सागर, मंत्री पंडित धर्मवीर आर्य, सचिव महेंद्र सिंह आर्य, कोषाध्यक्ष दिवाकर आर्य , वेद प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह आर्य ,शास्त्रार्थ महासभा के अध्यक्ष डॉ करण सिंह, आर्य समाज घोड़ी बछड़ा के अध्यक्ष रविंद्र आर्य ,मंत्री सतीश कुमार आर्य, आर्य समाज सूरजपुर के प्रधान मूलचंद शर्मा, मंत्री अनिल आर्य, जितेंद्र आर्य, वेद प्रचारिणी सभा के पदाधिकारी गजराज सिंह आर्य, हेमसिंह आर्य, शिव मुनि जी महाराज, महेश चंद्र आर्य ,वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र सिंह बंसल, राजेंद्र सिंहआर्य, अमन आर्य आदि उपस्थित रहे।
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