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बच्चे के मन को दर्शाता नाटक “एक बच्चे की डायरी”

जेडी न्यूज विजन….

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लखनऊ: : राजधानी में संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार के सहयोग से दो दिवसीय नाट्य समारोह की प्रथम संध्या में डॉ करुणा पाण्डेय लिखित एवं मुन्नी देवी निर्देशित नाट्य कृति का मंचन कल शाम अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ में किया गया ।
नाटक का कथनक के अनुसार यह कहानी एक संवेदनशील बच्चे समीर की है ,जो अकेलेपन और दबाव से घबराकर आत्महत्या का प्रयास करता है | समीर के मम्मी-पापा बहुत अच्छी नौकरी में थे | पैसों और आधुनिकता की चकाचौंध में डूबी राज (समीर की माँ ) अपने बेटे के बचपन की कोमल भावनाओं को नहीं समझ पाती हैं और  उसको आधुनिकता की चकाचौंध और हाई-फाई सोसायटी के अनुसार बनने के लिए दबाव डालती है | समीर को यह सब अच्छा नहीं लगता | एक दोस्त की सलाह पर वह डायरी लिखने लगता है | जब समीर की डायरी उसकी माँ को मिलती है तो वह अपनी मित्र रेखा के साथ यह डायरी शेयर करती है | डायरी पढ़कर रेखा को समीर के छिपे रूप  में बाल जीवन में  झाँकने का मौका मिलता है | वह राज से बात करते हुए  महसूस करती है कि राज ने अपने बचपन में जो कटुता और अभाव झेले हैं उनकी परछाई भी अपने बेटे पर नहीं पड़ने देना चाहती है और इसीलिये वह समीर को बहुत लाड-प्यार से भरा संपन्न जीवन देती है | पर वह भूल जाती है कि पैसा ,ओहदा और ऊंची सोसायटी को मासूम बचपन महत्त्व नहीं देता ,उसे तो स्वाभाविक और निश्छल जीवन पसंद आता है | बार बार वह अपनी अमीर मित्र के बेटे से समीर की तुलना करती है और उसे जानी  जैसा बनने के लिए प्रेरित करती है | माँ के इस व्यवहार से समीर आहत हो जाता है और माँ से धीरे धीरे दूर होता जाता है | समीर माँ को बहुत प्यार करता है पर माँ के गुस्से और जिद से डरता है इसलिए वह अकेला रह जाता है और परेशान होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाता है

 

रेखा के समझाने पर राज को अपनी गलती का अहसास होता है और वह वापस एक माँ बनकर समीर के साथ व्यवहार करती है | समीर को मनाने के लिए उसके दादा-दादी को बुला लेती है ,वह समझ जाती है कि बुजुर्ग घर के लिए क्यों जरुरी हैं | इससे यह सिध्द होता है कि हमारी संतति पर तीन पीढीयों के व्यवहार का प्रभाव पड़ता है | बचपन के अच्छे या बुरे अनुभव जीवन का आधार बनते हैं और  नई पीढी के मार्गदर्शक बनते हैं | अंत में जन्मदिन में अपनी डायरी और और माँ का सानिध्य पाकर समीर का मुस्कराता बचपन वापस लौट आता है |
मंच पर आदित्य शाक्य,लता बाजपेई,अनिल कुमार, अंशिका सक्सेना,प्रियंका भारती,दिव्यांश गुप्ता,कंचन शर्मा,निरुपमा राहुल,आरव,दिया भारती,आयुष शर्मा,एवं राज नंदिनी वर्मा ने सशक्त अभिनय किया ।
मंच परे प्रकाश – तमाल बोस,मुखसज्जा – राज किशोर गुप्ता,संगीत आदित्य कुमार शर्मा, मंच निर्माण – आशुतोष विश्वकर्मा, प्रस्तुति सहयोग – लावण्या बाजपेयी,मुकुल चौहान, योगेंद्र पाल,कोमल,मुकुल चौहान,प्रचार प्रसार – संकल्प शुक्ला,प्रेक्षाग्रह व्यवस्था में – गुरुदत्त पाण्डेय एवं प्रीती गोयल का सहयोग था ।
नाट्य समारोह की द्वतीय संध्या के अंतर्गत आज शंकर शेष लिखित एवं मुन्नी देवी निर्देशित हास्य नाट्य कृति टिल का ताड़ का मंचन किया जायेगा ।

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