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गांवों में चल रहा फाग (होली गीत) का रिहर्सल….

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९उड़त गुलाल भरत पिचकारी राधा- मोहन ख्यालै होरी हो..
सदा आनंद रहै यह नगरी मोहन ख्यालै होरी हो…

लखनऊ : : उड़त गुलाल भरत पिचकारी राधा- मोहन ख्यालै होरी हो
सदा आनंद रहै यह नगरी,मोहन ख्यालै होरी हो।, एक बर ख्यालै राम लक्ष्मण,एक बर सीता गोरी हो,एक बर ख्यालै भरत शत्रुघ्न,फाग हुएै बडजोरी हो।
सुल्तानपुर रोड स्थित सरसवां व अहिमामऊ में ग्रामीण होली पर भगवान कृष्ण व राम के साथ भगवान शिव पर आधारित वर्णन फाग को गाते हुए होलिका दहन की परिक्रमा करते हुए एक ओर त्योहार का उल्लास मानते है तो वहीं दूसरी तरफ होलिका से अपने गांव की प्रसन्नता की कामना करते हुए फाग की इन पक्तियों को गाते है।बुजुर्गो की माने तो अहिमामऊ में कई दशक से होली पर परंपरागत फाग होता रहा है। फाग में ग्रामीण सूर व कबीर के पदों को भी गाते है । राधा कृष्ण के लीला वर्णन पर फगुआ गाते हुए एक टोली गाती है ।

रविवार को सरसवां गांव में ढोलक की थाप व मजीरो की झंकार के साथ बुजुर्गों के युवा पीढ़ी भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे है। अपने से घर चली गूजरी,संग ना दूसर गुजरिया,जाय के पहुंची यमुना धाट पर,पडगै कृष्ण नजरिया,ग्वालिन सर पर धरै गगरिया,भरि पिचकारी मारी श्याम ने,टपकै रंग केशरिया, अंग अंग मा रंग बिराजै,भीगै चटक चुनरियां,ग्वालिन सर पर घरै गगरियां…इसके साथ ही: ब्रज में हरि होरी मचाई,बाचत झांझ मृदंग ढोल मंजीरा और शहनाई,उडै गुलाल लाल भए बादर,भयौ सकल ब्रज छाई,ब्रज में हरि मचाई ।शहर से लगे हुए अहमामऊ गांव को बढते विकास ने भले ही चारो तरफ से घेर लिया है, लेकिन ग्रामीणो ने अपनी पारंपरिक संस्कृति को नहीं बदला है। यहां होली के दिन एक तरफ जहां गलियों से फगुहारो की टोली निकलती है तो वहीं दूसरी तरफ छतो से बच्चे व महिलाएं अमीर गुलाल व रंग डालते है।
अहिमामऊ निवासी गिरिजा शरण सिंह,संजय द्विवेदी,ओम प्रकाश सिंह,त्रिभुवन शर्मा, निशीथ शुक्ला व गिरिजा शंकर द्विवेदी बताते है कि गांव में हम लोगो की कई पीढ़ियों से फाग होता आया है यही कारण है कि दूर दराज से भी लोग यहां फाग को सुनने व देखने आते है। सरसवां गांव में भी फाग गाने वाले लोग बताते है कि होली के दस दिन पहले से ही फाग का रिहलसल शुरू हो जाता है।

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