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बलरामपुर 23 मार्च : : मित्र राष्ट्र नेपाल के दांग चौघड़ा से पीर रतन नाथ योगी जी की शोभायात्रा नवरात्र के पांचवें दिन सोमवार को सिद्ध पीठ देवी पाटन पहुंची भारत नेपाल की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर दोनों देशों की धार्मिक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों की प्रगाढ़ता की निशानी है। हर साल यहां चैत्र नवरात्र में नेपाल से बाबा रतन नाथ की ऐतिहासिक पात्र देवता के रूप में शोभायात्रा आती है जो देवीपाटन मंदिर में आकर ठहरती है। यह यात्रा न केवल भारत नेपाल के लिए बल्कि सात समुंदर पार रहने वाले लोगों के लिए भी धार्मिक सांस्कृतिक आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। नेपाली भक्तों ने रथ से शोभायात्रा में नेपाल राष्ट्र के धार्मिक सांस्कृतिक सामाजिक संस्थाओं के लोगों ने हिस्सा लिया अपने पारंपरिक वेशभूषा में नेपाली भक्तों ने नृत्य करते हुए लोगों का ध्यान केंद्रित किया। आस्था का हुजूम स्थानीय मिल चुंगी नाके से प्रारंभ हुआ जो पुरानी बाजार होते हुए देवीपाटन के प्रसिद्ध दलीचा में स्थापित किया गया। दांग प्रांत से अमृत कलश यात्रा हर साल निकलती है। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालु अपने आराध्य देवता और अक्षय पात्र के साथ भारत आते हैं। एकादशी पर्व पर निकलने वाली शोभायात्रा को देवीपाटन पहुंचने में करीब नौ दिन का समय लगता है। जनकपुर महादेव मुक्तेश्वर नाथ मंदिर पर दो दिन ठहराव के बाद स्थानीय नकटी पुल पर कुट्टी बाबा स्थान पर पूजा पाठ कर रवाना हो जाते हैं। ऐसा बताया जाता है सिद्ध पीर बाबा रतन नाथ गुरु गोरखनाथ के शिष्य थे तथा मां पाटन पाटेश्वरी के प्रति उनकी अपार श्रद्धा थी। बाबा प्रतिदिन मां के दर्शन के लिए दांग नेपाल से आते थे। जनश्रुति के अनुसार लगभग 700 वर्ष तक पीर रतन नाथ बाबा जीवित रहे। गोलोक वासी होने के बाद गुरु गोरखनाथ द्वारा दिए गए अमृत कलश को बाबा रतन नाथ के प्रतिनिधित्व के रूप में नेपाल के दांग से देवीपाटन लाया जाता है। बताते हैं इस अमृत कलश के दर्शन मात्र से ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं इसलिए इस कलश के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्तगण पहुंचते हैं।51 शक्तिपीठों में एक देवीपाटन शक्तिपीठ का पूरे देश में प्रख्यात महत्व है यह सिलसिला विक्रम संवत 809 से शुरू हुआ था। शोभायात्रा प्रतिवर्ष चैत्र नवरात्र के पंचमी तिथि पर शक्तिपीठ देवीपाटन पहुंचती है। बताया जाता है कि बाबा रतन नाथ आठ प्रकार के सिद्धियों के स्वामी थे।
नेपाल के पुजारी संभालते हैं कमान:- शिव अवतार गुरु गोरखनाथ के शिष्य रतन नाथ की पूजा से मां पाटेश्वरी इतना प्रसन्न हुई कि इनसे कोई वरदान मांगने को कहा तब रतन नाथ जी ने कहा माता मेरी प्रार्थना है यहां आपके साथ मेरी भी पूजा हो। देवी ने उन्हें मनचाहा वरदान दे दिया तभी से मां पाटेश्वरी मंदिर प्रांगण में स्थापित दलीचा में अमृत कलश को स्थापित कर नवमी तक पूजा अर्चना होती है और दशमी को बाबा की विदाई पीठाधीश्वर योगी मिथलेश नाथ पूरे विधि विधान एवं दक्षिणा आदि अर्पित कर करते हैं। पूजा के दौरान घंटे व नगाड़े नहीं बजाए जाते हैं। मां पाटेश्वरी की पूजा सिर्फ रतन नाथ जी के पुजारी द्वारा की जाती है शोभायात्रा के साथ आए पुजारी पांच दिनों तक मंदिर के पुजारी को विश्राम देकर पूजा की कमान खुद संभालते हैं। शोभायात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए नेपाल राष्ट्र के अनेक विशिष्ट अतिथिगण अधिसंख्य नेपाली महिला पुरुष नागरिक अपने पारंपरिक वेशभूषा में सम्मिलित हुए। स्थानीय नकटी नाले पर स्वागत के लिए प्रसिद्ध कथावाचक युवा संत सर्वेश जी महाराज ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि प्रवीण सिंह विक्की क्षेत्रीय विधायक कैलाशनाथ शुक्ला विष्णुदेव गुप्ता दिलीप अनिल कुमार लाठ उमंग लाठ पंकज कानोड़िया पंकज जायसवाल राकेश सिंह विकास सोनी सत्यम श्रीवास्तव रोहित त्रिपाठी विवेक मोदनवाल विजय प्रताप सोनी रामदयाल सोनी विश्राम सिंह राजू अवन अनूप चरन व एडवोकेट सोनू पाल सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे। यात्रा के दौरान अग्रिम पंक्ति में हाथी चलायमान रही जो नन्हे मुन्ने बच्चों के आकर्षण का केंद्र रहा वहीं भक्तगण जय भवानी जय गोरखनाथ व जय रतन नाथ का उद्घोष कर रहे थे। शोभायात्रा देवीपाटन पहुंचने पर पीठाधीश्वर योगी मिथलेश नाथ ने विधि विधान से पीर रतननाथ का स्वागत किया तथा उन्हें प्रसिद्धि दलीचे में स्थापित कराया इस दौरान सदर विधायक पलटू राम क्षेत्रीय विधायक के अलावा सेवादार अरुण गुप्ता श्याम तिवारी विजय सिंह आदि उपस्थित रहे। सुरक्षा की दृष्टि से उपजिला अधिकारी राकेश कुमार जयंत अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पांडेय पुलिस उपाधीक्षक डॉक्टर जितेंद्र कुमार स्थानीय प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार सिंह उतरौला प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह के अलावा स्थानीय महिला पुरुष आरक्षियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
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