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तेहरान: : ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग के बीच पैदा हुए तेल संकट ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है. इस बीच मिडिल इस्ट की सबसे बड़ी डिप्लोमैटिक खबर सामने आ रही है. डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 5 दिनों के ‘युद्ध विराम’ के ऐलान के ठीक बाद, ईरान का एक हाई-लेवल डेलिगेशन पाकिस्तान के लिए रवाना होने वाला है।
मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, ईरान अब अमेरिका से सीधी बात करने से पहले मजबूत गारंटी चाहता है. तेहरान को अब ट्रंप की कही हुई बातों पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं रहा है क्योंकि में मस्कट से लेकर इस्तांबुल तक अमेरिका ने उसे तीन बार धोखा दिया है.
ईरान अब धोखा खाने की हालत में नहीं
ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करवाने वाले देशों- पाकिस्तान, सऊदी अरब और मिस्र को मोजतबा को भरोसा दिलाना होगा कि ट्रंप अपनी बात से मकरेंगे नहीं. इस गारंटी के बाद ही ईरानी डेलीगेशन जंग खत्म करने वाली बातचीत की टेबल पर बैठेगा.
ईरान का मानना है कि पिछले कुछ सालों में मस्कट, वियना और इस्तांबुल की वार्ताओं के दौरान अमेरिका ने उसे तीन बार धोखा दिया है. मaजतबा खामेनेई के शासन ने इस बार साफ कर दिया है कि वे सीधी बातचीत से पहले ‘ठोस और लिखित’ सुरक्षा गारंटी चाहते हैं.
ईरान का ‘पावर गेम’
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सूत्रों ने जो खुलासे किए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और रणनीतिक हैं. ईरान का मानना है कि अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है. इसीलिए वे इस बार सीधे अमेरिका से बात करने के बजाय पाकिस्तान, मिस्र और कतर जैसे देशों को ‘बफर’ यानी ढाल के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं.
इस्लामाबाद ही क्यों?
ईरान ने इस महा-मिशन के लिए पाकिस्तान को इसलिए चुना है क्योंकि तेहरान की लीडरशिप को पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर बड़ा भरोसा है. फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और ISI प्रमुख के साथ होने वाली यह गुप्त बैठक तय करेगी कि क्या पाकिस्तान, सऊदी अरब और मिस्र जैसे देश ईरान के लिए वो ‘बफर जोन’ बन पाएंगे, जिसकी मांग तेहरान कर रहा है. ईरान चाहता है कि अगर भविष्य में कूटनीतिक विफलता होती है, तो ये मध्यस्थ देश उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लें.
ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक मध्यस्थता करने वाले देश डिप्लोमैटिक फेलियर के खिलाफ लिखित और ठोस गारंटी नहीं देते, तब तक सीधी बातचीत की शुरुआत नहीं होगी.
इस्लामाबाद में मीटिंग का ब्लूप्रिंट
दावा किया जा रहा है कि अगले 72 घंटे मिडल ईस्ट के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण होने वाले हैं. ईरानी डेलिगेशन की पाकिस्तान के सैन्य और नागरिक नेतृत्व के साथ गहन चर्चा होगी. इस बीच, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इन खबरों को फिलहाल ‘अटकलें’ करार दिया है, लेकिन इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं. चर्चा तेज है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD वेंस, शांति दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के बेहद करीबी जेरेड कुशनर इसी हफ्ते इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों से आमने-सामने मिल सकते हैं.
ईरान का प्लान केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक और परमाणु मोर्चे पर भी खुद को सुरक्षित करना है. वो चाहता है कि तुर्की, मिस्र और ओमान जैसे देश मिलकर एक ऐसा ‘क्षेत्रीय गठबंधन’ बनाएं जो अमेरिका की मनमानी पर लगाम लगा सके।
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