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प्राकृतिक संसाधनों के अत्याधिक दोहन पर जताई गई चिंता….
लखनऊ, 31 मार्च: : एमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “सस्टेनेबल वाटर एंड नैचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट-इनोवेशंस एंड स्ट्रेटजीज (एस डबल्यू एन आर एम-2026)” का समापन मंगलवार को हुआ। सम्मेलन का आयोजन एमिटी स्कूल ऑफ एप्लाइड साइंसेज (एएसएएस) एवं डीन स्टूडेंट वेलफेयर विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
समापन सत्र में सीएसआईआर-फोर्थ पैराडाइम इंस्टीट्यूट, बेंगलुरु के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. कृष्णा चंद्र गौड़ा, एमिटी विश्वविद्यालय के डिप्टी प्रो वाइस चांसलर विंग कमांडर (डा.) अनिल तिवारी, एमिटी स्कूल ऑफ एप्लाइड साइंसेज की विभागाध्यक्षा प्रो. (डा.) असीता कुलश्रेष्ठए आरएमएलआईएमएस के प्रो. डॉ. मनोदीप सेन, सीएसआईआर-आईआईटीआर की वैज्ञानिक, डॉ. ज्योत्सना सिंह तथा बीबीडी विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. मोहित कुमार अग्रवाल, सहायक प्रवक्ता (एएसएएस) डा उपासना यादव और डा. जया पांडे उपस्थित रहे।
समापन सत्र के अवसर पर विंग कमांडर (डा.) अनिल तिवारी ने कहा कि सम्मेलन में यह स्पष्ट संदेश सामने आया कि युवा पीढ़ी प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझ रही है और उनके संरक्षण के लिए आगे आ रही है।
सम्मेलन के दौरान पोस्टर एवं मौखिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया, जिसमें प्रणव परिजात ने पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि डॉ. किमी को मौखिक प्रस्तुति में प्रथम पुरस्कार मिला।
प्रो. डॉ. मोहित कुमार अग्रवाल ने कहा कि ग्रीन बिल्डिंग की अवधारणा समय की आवश्यकता है। नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन और हरित क्षेत्र के उचित उपयोग से पर्यावरण को स्वस्थ बनाया जा सकता है।
डॉ. ज्योत्सना सिंह ने वायु प्रदूषण को “हाथी के समान समस्या” बताते हुए कहा कि हम इसे पूरी तरह समझ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने लिथियम आयन और नई पीढ़ी की बैटरियों के संभावित खतरों पर भी प्रकाश डाला।
डॉ. कृष्णा चंद्र गौड़ा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण देश में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ रही हैं और भारत उन देशों में शामिल है जो इसके प्रभाव से सबसे अधिक प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष के अधिकांश दिनों में देश में हीटवेव और बादल फटने जैसी चरम मौसमी घटनाएं देखने को मिल रही हैं।

सम्मेलन में पांच तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। डॉ. जया पांडे की अध्यक्षता में आयोजित सत्र में पर्यावरणीय कानून, ग्रीन केमिस्ट्री, ग्रीन हाइड्रोजन, जल अधिकार एवं सतत शहरी विकास जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
सम्मेलन में देशभर से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लेकर पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके समाधान पर विचार-विमर्श किया।
इस दौरान ‘नमामि गंगे’ परियोजना पर विशेष प्रस्तुति भी दी गई, जिसमें नदी संरक्षण और जल प्रबंधन के प्रयासों को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर संस्थानाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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