जेडी न्यूज़ विज़न….
छत्तीसगढ़ के औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा मानकों और मेंटेनेंस की अनदेखी निर्दोष मजदूरों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पावर और स्टील प्लांट के बायलर के भीतर तापमान 1,100 से 1,500 डिग्री सेल्सियस तक होता है। समय पर तकनीकी सुधार न होना, सुरक्षा उपकरणों का काम न करना और अनियंत्रित दबाव इन भीषण विस्फोटों की मुख्य वजह है।
बिलासपुर। औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मेंटेनेंस में बरती गई मामूली लापरवाही निर्दोष श्रमिकों-कर्मचारियों के लिए काल साबित होती है। पावर और स्टील प्लांटों के बायलर के भीतर का तापमान 1,100 से 1,500 डिग्री सेल्सियस तक रहता है, जो लोहे जैसी कठोर धातु को भी तरल बनाने की क्षमता रखता है। इतनी प्रचंड ऊष्मा के बीच भाप का अनियंत्रित दबाव किसी भी कमजोर ढांचे को फाड़कर भीषण विस्फोट का रूप ले लेता है।
हाल के वर्षों में प्रदेश में हुए बड़े हादसों की जांच रिपोर्टों ने भी इस कड़वे सच की पुष्टि की है कि समय पर तकनीकी सुधार न करना ही सबसे बड़ी चूक रही है। मरम्मत और रखरखाव की यही छोटी सी कोताही न केवल संयंत्रों को मलबे में तब्दील कर रही है, बल्कि अपनों को खोने वाले परिवारों के जीवन में एक ऐसी कभी न खत्म होने वाली हूक और पीड़ा छोड़ गई है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
बायलर विस्फोट के प्रमुख तकनीकी कारण
बायलर मूल रूप से एक बंद तंत्र है, जहां पानी को उच्च ताप और अत्यंत उच्च दबाव पर भाप में बदला जाता है। इसके फटने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
पानी का स्तर कम होना – यदि बायलर के भीतर पानी का स्तर निश्चित सीमा से कम हो जाए, तो धातु अत्यधिक गर्म हो जाती है। अचानक ठंडा पानी आने पर वह तुरंत भाप में बदलता है और बढ़ा हुआ दबाव बायलर को फाड़ देता है।
सेफ्टी वाल्व की विफलता – हर बायलर की एक ‘डिजाइन प्रेशर’ सीमा होती है। यदि सेफ्टी वाल्व जाम हो जाए, तो भाप का दबाव सुरक्षित सीमा से बाहर चला जाता है, जो विस्फोट का कारण बनता है।
(सुषमा बंजारे)
विशेष संवाददाता…
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