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बलरामपुर: : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘जनसुनवाई पोर्टल’ (IGRS) जिले में साइबर ठगों के आगे बेअसर साबित हो रहा है। तुलसीपुर के एक युवक से सरकारी अधिकारी बनकर 40 हजार रुपये की ठगी कर ली गई, लेकिन पुलिस और पोर्टल पर शिकायत के बावजूद अब तक न तो अपराधियों का पता चला है और न ही पीड़ित के पैसे वापस मिल पाए हैं।
पोर्टल से उम्मीद टूटी, पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
ग्राम बेलीखुर्द निवासी सर्वजीत पासवान ने बताया कि ठगी का शिकार होने के तुरंत बाद उन्होंने न्याय की आस में मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (संदर्भ संख्या: 40018226006400) पर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। हैरानी की बात यह है कि साइबर अपराध जैसे गंभीर मामले में भी प्रशासन ने इसे फाइलों में दबा रखा है। पीड़ित का आरोप है कि शिकायत के कई दिन बीत जाने के बाद भी उसे केवल आश्वासन मिला है, जबकि ठग बेखौफ होकर घूम रहे हैं।
वर्दी का डर दिखाकर हुई ठगी
बता दें कि ठगों ने व्हाट्सएप पर पुलिस अधिकारी की फोटो लगाकर पीड़ित को झांसे में लिया था। खुद को सीएमओ ऑफिस का कर्मचारी बताकर और पुलिस का भय दिखाकर ठग ने करीब 40,000 रुपये दो ट्रांजेक्शन के जरिए ऐंठ लिए। पीड़ित ने ट्रांजेक्शन की आईडी और बैंक डिटेल्स भी पुलिस को सौंपी हैं, फिर भी कार्यवाही की रफ्तार सुस्त है।
आम जनता में बढ़ा रोष
तुलसीपुर और आस-पास के क्षेत्रों में इस घटना के बाद लोगों में रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जनसुनवाई पोर्टल और पुलिस अधीक्षक को सीधे शिकायत देने के बाद भी सुनवाई नहीं होगी, तो गरीब आदमी अपनी गुहार लेकर कहां जाएगा? जिले में सक्रिय यह संगठित गिरोह लगातार डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर लोगों को शिकार बना रहा है, लेकिन प्रशासन केवल ‘जागरूकता’ के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है।
”प्रार्थी ने सभी साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध करा दिए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। विपक्षी का फोन बंद है और पीड़ित आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान है।”
— पीड़ित का बयान
यह खबर प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए उपयुक्त है। क्या आप चाहते हैं कि मैं इस मामले में विभाग के किसी अधिकारी के लिए एक RTI (सूचना का अधिकार) ड्राफ्ट भी तैयार कर दूँ, ताकि यह पता चल सके कि शिकायत पर अब तक क्या प्रगति हुई है?
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