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नई दिल्ली: : शुक्रवार को जारी सांख्यिकी मंत्रालय के पिछले कैलेंडर वर्ष के ‘पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे’ (PLFS) के अनुसार, 2025 में नौकरियों की तीनों श्रेणियों में महिलाओं की मज़दूरी पुरुषों की तुलना में तेज़ी से बढ़ी।
आंकड़ों के अनुसार, 2025 में वेतनभोगी नौकरियों, स्वरोज़गार और कैज़ुअल मज़दूरी में महिलाओं की कमाई में क्रमशः 7.2%, 8.8% और 5.4% की वृद्धि हुई, जबकि 2024 में यह कम थी।
वहीं, पुरुषों की कमाई में वेतनभोगी नौकरियों और स्वरोज़गार में क्रमशः 5.8% और 8% की वृद्धि हुई, लेकिन कैज़ुअल मज़दूरी में 0.2% की गिरावट आई। हालांकि, यह सच है कि महिलाएं अभी भी पुरुषों की तुलना में बहुत कम कमाती हैं। वेतनभोगी नौकरियों में, 2025 में महिलाओं ने पुरुषों की कमाई का केवल 76% ही कमाया, जो 2022 के मुकाबले थोड़ा ही बदला है। वहीं, कैज़ुअल मज़दूरी में, 2025 में आय असमानता में थोड़ा सुधार देखा गया; महिलाओं ने पुरुषों की कमाई का 69% कमाया, जो 2024 में 66% था।
हालांकि, जब स्वरोज़गार की बात आती है तो महिलाओं की स्थिति सबसे खराब होती है। पीएलएफएस के आंकड़ों के अनुसार, वे पुरुषों की कमाई का केवल 36% ही कमाती हैं। एक और सकारात्मक बात यह है कि पीएलएफएस – जो भारत सरकार का प्रमुख रोज़गार सर्वेक्षण है – ने दिखाया कि वेतनभोगी नौकरियों में महिलाओं का अनुपात 2024 के 16.6% से बढ़कर 2025 में 18.2% हो गया, जबकि स्वरोज़गार में उनका हिस्सा 66.5% से घटकर 64.2% रह गया।
कैज़ुअल मज़दूरी में यह अनुपात 16.9% से बढ़कर 17.6% हो गया। पुरुषों के लिए भी यह रुझान कुछ हद तक ऐसा ही रहा। अखिल भारतीय स्तर पर, वेतनभोगी नौकरियों में लगे लोगों का अनुपात 2024 के 22.4% से बढ़कर 23.6% हो गया। वेतनभोगी नौकरियां उच्च गुणवत्ता वाले रोज़गार का संकेत होती हैं, क्योंकि इनमें अन्य लाभों के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा का भी लाभ मिलता है।
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