जेडी न्यूज़ विज़न….
*आगे भी जा सकते हो*
बराबरी ही क्यों करना है,
बराबरी पर क्यों मरना है।
बराबरी मंजिल नहीं होती,
बराबरी पर नहीं अड़ना है।।
आगे भी हम जा सकते हैं,
मन को ऐसा बना सकते हैं।
मेरा मन जैसा भी होता है,
उसी राह तो जा सकते हैं।।
बराबरी की मन कहता है,
तू किस गफलत में रहता है।
सोच बराबरी की ही रहती है,
जीवनभर बराबर ही रहता है।।
सोच बदलकर आगे जाओ,
मन को तुम मजबूत बनाओ।
तव अंतस में अज्ञान भरा है,
सत्वर उसको दूर भगाओ।।
हमको नहीं बराबर जाना,
लौट के पीछे भी न आना।
ऐसी मन में सोच बनाकर,
तू उन्नति पथ को अपनाना।।
जो खुद अपनी राह बनाता,
कभी न मेहनत से घबराता।
अपने पर जो भरोसा करता,
निश्चित वही सफलता पाता।।
निश्चित तुम उद्देश्य बनाओ,
मन को कभी नहीं डरपाओ।
आज अगर तुम डर जाओगे,
उन्नति कभी न कर पाओगे।।
जो बड़ों का आदर करता,
वृद्ध जनों की सेवा करता।
आयु विद्या यश औ बल की,
शत प्रतिशत ही वृद्धि करता ।।
जो सोचोगे वह पाओगे,
नोचोगे तो रगड़े जाओगे।
निर्मल अंत:करण बनाओ,
कभी नहीं तुम पछताओगे।।
डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी
‘ विद्या – सागर ‘
खुर्जा, बुलंदशहर ( उ. प्र.)
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