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ग्रेटर नोएडा : : 26 अप्रैल 2026 : यहां स्थित आर्य समाज नवादा के प्रमुख स्तंभ रहे प्रधान भूलेसिंह आर्य की स्मृति में विशाल यज्ञ का आयोजन किया गया। इस यज्ञ के ब्रह्मा स्वामी वेदानंद सरस्वती जी महाराज रहे। उनका साथ आर्य जगत के सुप्रसिद्ध विद्वान आचार्य वेद प्रकाश जी ने दिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे दर्शनों और उपनिषदों के विद्वान श्री देवेंद्र सिंह आर्य ने कहा कि ईशावास्योपनिषद का प्रथम मंत्र हमें स्पष्ट करता है कि संसार के कण कण में परमपिता परमेश्वर का वास है। इस मंत्र में हमें बताया गया है कि हमें संसार के पदार्थों का त्याग भाव से सेवन करना चाहिए । क्योंकि यह धन किसी का भी नहीं है। इसमें लालच नहीं पालना चाहिए। जिसके जीवन में इस प्रकार का भाव होता है वही व्यक्ति संसार में वास्तव में अनुकरणीय और सार्थक जीवन जीने में सफल होता है। प्रधान भूले सिंह जी का जीवन इसी प्रकार त्याग और समर्पण से बना हुआ जीवन था। उन्होंने आर्य सिद्धांतों के प्रति समर्पण रखते हुए जीवन जिया और अपनी संतान को भी इसी प्रकार के संस्कार देने में सफलता प्राप्त की।

मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि यक्ष युधिष्ठिर का संवाद हमें बताता है कि आकाश से भी ऊंचा स्थान पिता का होता है। क्योंकि पिता की कल्पना आकाश से भी ऊंची होती है। वह अंतरिक्ष को चीरती हुई वहां तक चली जाती है ,जहां तक की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यह अंतरिक्ष अनंत प्रभु की अनंत कथा का जीवंत उदाहरण है। जिसकी गहराई को कोई नाप नहीं पाया। अभी हाल ही में एक ऐसे तारे की खोज की गई है जिसमें हमारे सूर्य जैसे 10 अरब तारे समा सकते हैं। इतना ही नहीं एक स्थान ऐसा भी आता है जहां 33 करोड़ प्रकाश वर्ष चलते रहने तक भी कुछ नहीं मिलता। देखने समझने वाली बात यह है कि 33 करोड़ प्रकाश वर्ष की उस अनंत यात्रा में भी अनंत प्रभु की अनंत कथा हमारे साथ चलती रहती है। याद रखना चाहिए कि यहां भी पिता का आशीर्वाद हमारे साथ होता है। जो संतान इस भाव और रहस्य को समझती है वह हरि अनंत हरि कथा अनंता का रहस्य समझ जाती है । प्रधान भूले सिंह आर्य जी के परिवार के लोग उनके प्रत्येक पवित्र कार्य को हृदय में बसा कर आगे बढ़ रहे हैं। प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य इसे अपनी शानदार विरासत मानते हैं। सही मायनों में वह अपने पिता के अनुव्रती पुत्र हैं।
भाषा प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष ब्रह्मचारी आर्य सागर ने कहा कि पिता चेतन देवता की श्रेणी में आता है। उसके विचार जीवन भर हमारे लिए काम आते रहते हैं। उसकी दी हुई प्रेरणा हमें जीवन में ऊंचाइयों तक लेकर जाती है। इसलिए पिता के प्रति सदैव ही सम्मान का भाव रखना संतान का पवित्र कार्य होता है। आज हमें प्रधान भूले सिंह आर्य जी की पांचवीं पुण्यतिथि के अवसर पर अपने अपने पिताओं के बारे में हमें यही संकल्प लेना चाहिए कि हम भी उनके पवित्र कार्यों के प्रचारक बनेंगे।
आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुध नगर के पूर्व अध्यक्ष सरपंच रामेश्वर सिंह और देव मुनि जी महाराज के साथ-साथ आर्य समाज दनकौर के प्रधान नरपत सिंह आर्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रधान भूले सिंह ने ईमानदारी और सादगी का जीवन जीकर एक मिसाल स्थापित की। आर्य समाज के सिद्धांतों के प्रति वह सदा संकल्पित रहे और उन्हीं का प्रचार प्रसार करना अपने जीवन का व्रत बनाया। इस अवसर पर स्वामी वेदानंद जी महाराज ने बहुत ही सुंदर गीत की प्रस्तुति दी। इसी प्रकार पहलवान पूरन सिंह आर्य ने भी गीत प्रस्तुत पर दिवंगत भूल सिंह जी को अपनी भावांजलि प्रस्तुत की। इस अवसर पर रमेश आर्य, राम सिंह आर्य , राम प्रसाद आर्य, हेम सिंह आर्य, गजराज सिंह आर्य, राजेंद्र सिंह आर्य, सुदेश भाटी, सत्यपाल भाटी, हरिकिशन आर्य, ब्रह्म सिंह आर्य, सुनील कुमार आर्य, जीतराम आर्य, जिला उपाध्यक्ष महावीर सिंह आर्य , जिला सचिव महेंद्र सिंह आर्य, पवन आर्य, महाशय किशनलाल आर्य, महाशय रंगीलाल आर्य, हर स्वरूप आर्य मास्टर दिनेश सिंह, प्रिंसिपल नरपत सिंह, माता भगवती देवी और महिला आर्य समाज से जुड़ी अनेक देवियों सहित सैकड़ो आयोजन उपस्थित थे।
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