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कवि का क्रांतिदर्शी स्वरूप होता है परमात्मा के समान : डॉ आर्य….

जेडी न्यूज विजन….

नई दिल्ली : : यहां स्थित हिंदी भवन में सृजनाभिनन्दनम -4 के अंतर्गत देश के प्रतिष्ठित कवियों का एक विशेष सम्मेलन आहूत किया गया । इसके संयोजक रहे डॉ राकेश छोकर ने हमें बताया कि इस अवसर पर कवियों ने अपनी प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया। जिनमें देश धर्म और समाज चिंतन प्रमुख रहा। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं डॉक्टर मीनू पांडे ने कहा कि साहित्यकार को साहित्य सृजन के समय समस्त समाज का हित ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश और समाज में प्रत्येक प्रकार की विकृति पर कवि को खुलकर बोलना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुप्रसिद्ध इतिहासकार डॉक्टर राकेश कुमार आर्य ने कहा कि परमपिता परमेश्वर ने वेद आदि शास्त्रों को काव्य के रूप में प्रस्तुत किया। संसार के सभी विद्वान इस बात से सहमत हैं कि संसार की सबसे प्राचीन पुस्तक ऋग्वेद है। जो कि ईश्वर की वाणी है। इस प्रकार ईश्वर स्वयं अपने आप में कवि है । स्वामी दयानंद जी महाराज ने सत्यार्थ प्रकाश में परमपिता परमेश्वर के 100 नामों की व्याख्या करते हुए उनका एक नाम कवि भी बताया है। कई क्रांतदर्शी होता है ।जो सब कुछ जानता है और विद्वान होने के कारण वह तत्वदर्शी होता है। इसलिए उसको परमपिता परमेश्वर का साक्षात रूप कहा जा सकता है । आज के कवि को अपने इसी रूप को समझने की आवश्यकता है। इसलिए उसे किसी भी प्रकार की संकीर्णता में नहीं फंसना चाहिए। उन्होंने सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ विनय कुमार सिंघल की पुस्तक राम का अंतर्द्वंद्व पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसमें कवि ने अपनी निराली प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। जो कि आज की युवा पीढ़ी के लिए ही नहीं आने वाले समाज के लिए भी युवाओं का मार्गदर्शन करती रहेगी। डॉ सिंगल की अनुपम प्रतिभा जिस रूप में आज प्रस्फुटित हुई है वह एक नया इतिहास लिखने के लिए आतुर दिखाई देती है।
इस अवसर पर संतोष कुमार हिंदवी ने अपनी कविता से सबका मन मोह लिया। उन्होंने सारे मंच को ही कविता के रूप में बांधकर अपनी निराली कवि प्रतिभा का परिचय दिया। कार्यक्रम के संयोजक रहे डॉ राकेश छोकर ने अपनी पुस्तक के विमोचन के संबंध में विचार प्रकट करते हुए कहा कि कविता को राष्ट्रबोध, संस्कृति बोध, भाषा बोध कराने वाली होना चाहिए और मैंने अपनी आज प्रकाशित हुई पुस्तक में इस बात का भरपूर ध्यान रखा है।
कवि सम्मेलन में उपस्थिति रही विभा राज वैभवी , प्रोफेसर वीणा शंकर शर्मा,डॉ हरिसिंह पाल , डॉ विनय सिंघल,डॉ रीता नामदेव , डॉ कीर्ति वर्धन, आदि कवियों ने भी अपना कविता पाठ किया। सभी कवियों ने साहित्य सृजन के माध्यम से समाज के लिए उपयोगी विचारों और भावों को कविता के रूप में प्रवाहित किया।
समारोह में ‘अनुभूति’युगल-काव्य संकलन (डॉ.राकेश छोकर व डॉ.विनय कुमार सिंघल ‘निश्छल’),’माघ-परिमल’साझा काव्य संकलन सम्पादकः डॉ.विनय कुमार सिंघल ‘निश्छल’ ,सह-सम्पादकःशंभु अमिताभ, ‘राग-रंग-रस-गंध-वर्ष नव’साझा काव्य संकलन सम्पादकःडॉ.विनय कुमार सिंघल ‘निश्छल’सह-सम्पादकःडॉ.वीणा शंकर शर्मा ‘चित्रलेखा’ (वसन्तोत्सव)अंजू कालरा दासन ‘नलिनी'(होली)सुचेता कटारिया, कैलिडोस्कोप अँग्रेज़ी-एकल काव्य संकलन डॉ.विनय कुमार सिंघल ‘निश्छल’,बृहत् कहमुकरी संसार 251 कहमुकरी संकलनरचयिताः डॉ.वीणा शंकर शर्मा ‘चित्रलेखा’, ‘काव्य-ऋतुरोहित’ सप्त-रंग—सप्त-स्वरसंयुक्त काव्य-संकलन (सात प्रतिभागी) प्रथम कड़ी सम्पादनःडॉ.विनय कुमार सिंघल ‘निश्छल’ ‘मनोभावों में प्रतिसाद’२०० मुक्तक संग्रह डॉ.यशवन्त भंडारी ‘यश’ का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया।
नई दिल्ली स्थित हिंदी भवन में वाङ्मय कला संगम के तत्वाधान में आयोजित सृजनाभिनंदनम् चतुर्थ संस्करण में देश भर से साहित्य, कला,रंगमंच,योगायुर्वेद जगत की ख्यातिलब्ध हस्तियों की उपस्थिति रही।

 

इनमें मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता, सम्पादक, राजनीतिक समीक्षक, आलोचक एवं विभिन्न राष्ट्रीय संगठनों के संस्थापक डॉ सैय्यद खालिद कैश , मुख्य वक्ता के रूप में निदेशक, बाल साहित्य शोध सृजन पीठ, मध्य प्रदेश शासन, साहित्य अकादमी, संस्कृति परिषद, भोपाल से डॉ मीनू पांडेय ‘नयन’, अति विशिष्ट अतिथि के तौर पर हिन्दी साहित्य के प्रकांड विद्वान, छंद मर्मज्ञ, समीक्षक संतोष कुमार तिवारी ‘हिन्दवी’ (लखनऊ), अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार राधा पांडेय (सिक्किम), वरिष्ठ साहित्यकार डॉ यतींद्र कटारिया, आयुर्वेद के ज्ञाता डॉ पहल सिंह सैनी, कला जगत से वायर आर्टिस्ट उदित नारायण बैंसला, राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त मिनिएचर आर्टिस्ट हनुमान सैनी, जेमस्टोन कार्विंग आर्टिस्ट पृथ्वी राज कुमावत जयपुर, वरिष्ठ साहित्यकार राजेश कुमार राज, ट्रू मीडिया के चीफ एडिटर डॉ ओमप्रकाश प्रजापति, दिल्ली विश्वविद्यालय से डॉ रीता नामदेव,नागरी लिपि परिषद के महामंत्री डॉ हरि सिंह पाल, अंजू कालरा दासन ‘नलिनी’, डॉ पूजा भारद्वाज, हिंदी साहित्य संस्थान ट्रस्ट की संस्थापक/संचालिका विभा राज वैभवी, निधि भार्गव मानवी,डॉ कीर्ति वर्धन अग्रवाल, पूर्व मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ओम सपरा, गीतकार वीरेन्द्र मंसोतरा, रमन पालसिंह, शंभु अमिताभ , रामानुज सिंह सुंदरम,आदि शामिल थे। अध्यक्षता डॉ राकेश कुमार आर्य और संयुक्त संचालन डॉ चंद्र मणि ब्रह्मदत्त, डॉ राकेश छोकर का रहा। मुख्य संयोजक संस्था के संस्थापक अध्यक्ष डॉ विनय कुमार सिंघल ‘निश्छल’ एवं संरक्षक डॉ राकेश छोकर रहे।
इस अवसर पर मुख्य वक्ताओं ने वर्तमान में साहित्य, सिनेमा, कला, रंगमंच एवं योगायुर्वेद पर अपने अपने वक्तव्य दिए। प्रसिद्ध  कवियों द्वारा काव्य पाठ किया गया।विद्वत जनों और अतिथियों को वाङ्मय वैशिष्ट्य वैभव, वाङ्मय विभूषण वैभव एवं वाङ्मय कला विभूषण वैभव सम्मान से सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में अन्य प्रतिष्ठित अतिथि गणों में वरिष्ठ साहित्यकार विनय विक्रम सिंह,वर्ल्ड रिकॉर्डस होल्डर अनुज योगी, अर्जुन स्वामी, योग विज्ञान एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉ नवीन वागद्रे , अश्वनी दासन ,सुरेन्द्र भाटी, प्रेमराज भाटी, श्यामपाल सिंह गुर्जर, शेखर पंवार, सोमपाल सिंह पुंडीर प्रसिद्ध साइक्लिस्ट, पंकज कुमार पुंडीर, सुबोध कुमार कश्यप, जसबीर सिंह,,डॉ.स्वदेश चरौरा,नीना गुप्ता’,पूनम अरोड़ा, रामानुज सिंह सुंदरम, डिंपल वर्मा, जितेन्द्र सिंह, डॉ राम कुमार पुंडीर, मंगल सिंह राज, वीरेंद्र सिंह पथिक, , ओमपाल सैनी, अशोक सैनी , सूरज सैनी आदि शामिल थे।

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