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साइबर अपराध के “Sleeper Cells” बने म्यूल अकाउंट सिंडिकेट पर तारबाहर पुलिस का प्रहार…

जेडी न्यूज़ विज़न….

बिलासपुर (छ.ग.) : : साइबर अपराध के “Sleeper Cells” बने म्यूल अकाउंट सिंडिकेट पर तारबाहर पुलिस का प्रहार…

बैंक खातों के बदले कमीशन देकर तैयार किया जा रहा था म्यूल अकाउंट नेटवर्क

आरोपी के कब्जे से विभिन्न बैंक खातों की जानकारी से भरा मोबाइल जप्त

तारबाहर पुलिस की त्वरित कार्यवाही, आरोपी गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपी :-

दीपेश कुमार गुप्ता पिता दिलीप कुमार गुप्ता, उम्र 21 वर्ष, निवासी ग्राम सिरसी, थाना बसदई, जिला सूरजपुर (छ.ग.)

मामले का संक्षिप्त विवरण :-

दिनांक 13.05.2026 को थाना तारबाहर पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि एक युवक काला टी-शर्ट पहनकर स्टेट बैंक व्यापार विहार बिलासपुर के आसपास खड़ा है तथा बैंक आने-जाने वाले लोगों से उनके बैंक खाते प्राप्त कर बदले में कमीशन देने का लालच दे रहा है।
सूचना से तत्काल पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह (भा.पु.से.) को अवगत कराया गया, जिनके द्वारा त्वरित कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) पंकज कुमार पटेल एवं नगर पुलिस अधीक्षक सिटी कोतवाली गगन कुमार (भा.पु.से.) के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी तारबाहर निरीक्षक रविन्द्र अनंत के नेतृत्व में टीम गठित कर मौके पर दबिश दी गई।
पुलिस टीम द्वारा संदिग्ध युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें आरोपी ने स्वीकार किया कि वह विभिन्न व्यक्तियों से बैंक खाते एवं बैंकिंग जानकारी लेकर उन्हें अन्य लोगों को उपलब्ध कराता था तथा बदले में नकद कमीशन प्राप्त करता था।
जांच के दौरान आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन जप्त किया गया, जिसमें विभिन्न बैंकों के खातों से संबंधित जानकारी एवं संपर्क विवरण पाए गए हैं। पुलिस द्वारा मोबाइल डेटा एवं तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

म्यूल अकाउंट सिंडिकेट : साइबर अपराध का “स्लीपर सेल”

प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि ऐसे “म्यूल अकाउंट सिंडिकेट” साइबर अपराधियों के लिए “Sleeper Cells” की तरह कार्य करते हैं। ये लोग सामान्य नागरिकों के बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने, ट्रांसफर करने एवं तुरंत निकालने के लिए करते हैं, जिससे वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
साइबर अपराधों में उपयोग होने वाले ऐसे खाते राष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराध नेटवर्क का हिस्सा होते हैं और इनके माध्यम से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की रकम देशभर में घुमाई जाती है।

बिलासपुर पुलिस की अपील

किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल नंबर या इंटरनेट बैंकिंग सुविधा कमीशन के बदले उपलब्ध कराना गंभीर अपराध है। ऐसा करने पर संबंधित व्यक्ति भी साइबर अपराध में सह-अभियुक्त माना जा सकता है तथा उसके विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

“आपका बैंक खाता – आपकी जिम्मेदारी”
सतर्क रहें, साइबर अपराध से सुरक्षित रहें।

उक्त कार्यवाही में निरीक्षक रविन्द्र अनंत, सउनि उदयभान सिंह, आरक्षक राहुल राजपूत, कौशल जांगड़े एवं महेन्द्र सोनकर का सराहनीय योगदान रहा।

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