जेडी न्यूज विजन….
ईमान का फितूर
सोचता हूँ इस स्वार्थ के बाज़ार में,
क्यों न मैं भी बस अपना ही सोचूँ?
जब व्यस्त हैं सब यहाँ खुद को सँवारने में,
तो क्यों न मैं भी ज़माने की राह पर चलूँ?
पर दिल के किसी कोने में छुपा बैठा है,
दूसरों का भला करने का एक अजब फितूर।
ज़माना चाहे कितना भी खुदगर्ज़ हो जाए,
यह फितूर मुझे बदलने नहीं देता हुज़ूर।
सब चाहते हैं मैं बनूँ हर किसी का संबल,
उनकी राहों का सहारा, उनका हमकदम।
मगर जब बात आए दूसरों की मदद की,
तो पीछे खींच लेते हैं अपने ही वो कदम।
दुनियादारी के किस्से भरे पड़े हैं स्वार्थ से,
यहाँ हर रिश्ता किसी मतलब से जुड़ा है।
पर लाख कोशिशों के बाद भी इस दिल को,
ईमान से बेवफ़ाई करना कहाँ आता है?
जब किसी ने पुकारा, मैं सब छोड़ चल दिया,
उनके सुख-दुख में पूरी शिद्दत से साथ निभाया।
मगर जब आई खुद पर कोई भारी ज़रूरत,
पलट कर देखा, तो खुद को तन्हा ही पाया।
फिर भी यह “माणिक” अपनी चमक न खोएगा,
दुनिया के रंग में खुद को न डुबोएगा।
छोड़कर स्वार्थ की इस अंधी दौड़ को,
ईमान की राह पर ही सुकूँ से सोएगा।
– मदन वर्मा माणिक
इंदौर, मध्यप्रदेश
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