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नारी तत्व (काव्य)
दिनांक :- 8/3/2026
मन से जो कभी न हारे, जो केवल दर्द निहारे,
फिर भी कहेती है नहीं हम कोई अनमोल सितारे।
माथे पर बिंदी सजाए, हाथ में चूडी खनकाए,
पायल पैरों की संगीत कोई अनमोल नज़ारे।
वह शिक्षित भी, वह अनपढी भी है मगर वह,
भीतर से अनोखी प्रार्थना कौई अनमोल सहारे।
सुनती सभी का, न कभी अपनी ही सुनाती,
श्रोता समझ कायम स्व को कोई अनमोल ईशारे।
आशा है, अभिलाषा है, क्या सच में परिभाषा है!
ब्रह्मांड की शक्ति दैवी नारी हर बोल संवारे।
किमत इसकी न लगावो ए जगवालों,
नारी तत्व को माॅं कहे इश्वर भी हृदय उभारें।
✒️ किरण चोनकर “दिवानी”
धरमपुर (गुजरात)
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