जेडी न्यूज विजन….
सन्तोष कुमार गुप्ता….
गोरखपुर : : ग्राम पंचायत तीयर के बरइठ चौराहा में आयोजित श्रीमदभागवत कथा में तृतीय दिवस कथाव्यास आचार्य विनोदजी महाराज ने कहा, संघर्षों से जी चुराने वाला कायर कहलाता है। ऐसा व्यक्ति कभी भी अपने महापुरुषत्व और महापुरुषार्थ को प्रगट नहीं कर सकता है । मुसीबतें इंसान को मजबूत बनाने के लिए आती हैं। समस्याओं से जो व्यक्ति घबराकर भागने या छिपने का प्रयास करता है,य उसे कोई भी सफलता वरण नहीं करती है, विपरीत परिस्थितियों का सामना है करने से जो भी चुराता है उसका भाग्य हरदम रोने को मजबूर रहता है। मां बाप की कमाई के बल पर अपनी अकड़ दिखाना, अथवा गुरुजनों के तपोबल अर्जित प्रतिष्ठा पर अपनी ऐंठ दिखाना, यह तो आलसी इंसान की निशानी है। श्रेष्ठ वही जिसने किसी की कृपा की भीख मांगे बिना बड़े से बड़े विपरीत तूफानों को मटियामेट करते हुए सफलता के ध्वज लहराते हैं ।
मां-बाप या गुरुदेव के नाम पर दुनियां में अपनी पहचान बनाना, व प्रतिष्ठित होना आलसी के लिए बहुत आसान है, लेकिन खुद की व्यक्तिगत पहचान से माता- पिता- गुरु की पहचान बनाने वाले सच्चे सुपुत्र या सुशिष्य कहलाते है । दुनियां में कदर उसी इंसान की होती है जो संघर्षों के बाद मंजिल प्राप्त करते हैं । अथक प्रयासों, संघर्षों से निखरकर ही कोई महापुरुष तैयार होते हैं।
मंदिर में वही पत्थर शिव रूप में पूजे जाते हैं जो नदी के प्रवाह में बहते समय अनेक पत्थरों का ठोकर खाकर भी टूटते नहीं और नदी की धारा में बहते बहते शिव रूप बन जाते हैं अथवा जो मूर्तिकार की हथौड़ियों की चोट खाकर भी खुद को टूटने न दिया हो, वही सुंदर मूर्ति मंदिर में प्रतिष्ठित होती है। दुनिया पहले तिरस्कार करती है, परेशान करती है । ।।।सबकुछ जानकर जब व्यक्ति उच्च पद, गौरव को हासिल करता है तो तिरस्कार करने वाली दुनिया ही पलट कर नमस्कार करने लग जाती है।
संघर्षों से भागो मत, उठो ? जमकर सामना करो, सफलता ऐसे व्यक्ति के लिए ऊलिए वरमाला लेकर खड़ी रहती है। हमें भगवान को स्मरण करते हुए जीवन की सफलता के शिखर की ओर बढ़ते रहना चाहिए । यही सच्चे मनुष्य का कर्तव्य है।
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