जेडी न्यूज़ विज़न….
०दूर हुआ तारीख का भ्रम….
अयोध्या में रामनवमी 2026 की तिथि को लेकर बना भ्रम अब समाप्त हो गया है. ज्योतिष गणना और पंचांग के अनुसार, 27 मार्च को मध्याह्न काल में पुनर्वसु नक्षत्र के शुभ संयोग के बीच प्रभु श्री राम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. ज्योतिषाचार्य पंडित प्रवीण शर्मा के मुताबिक, दोपहर 12 बजे नवमी तिथि की व्याप्ति होने से यही समय शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ है. भक्त इस पावन दिन रामनगरी के मंदिरों में भव्य आरती और पूजन में सम्मिलित होकर अक्षय पुण्य प्राप्त कर सकते हैं.
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि, जिसे हम रामनवमी के रूप में मनाते हैं, न केवल अयोध्या बल्कि संपूर्ण विश्व के सनातनी समाज के लिए आस्था का चरम बिंदु है. इस वर्ष अयोध्या में रामनवमी की सही तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के बीच व्याप्त भ्रम की स्थिति अब पूरी तरह स्पष्ट हो गई है. ज्योतिष गणनाओं और धर्मशास्त्रों के अनुसार, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्मोत्सव इस बार 27 मार्च को पूरी भव्यता के साथ मनाया जाएगा. रामनगरी के मठ-मंदिरों में इसकी तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं.
क्यों है 27 मार्च का दिन सबसे खास?
अयोध्या के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित प्रवीण शर्मा के अनुसार, हिंदू पंचांग की गणना यह स्पष्ट करती है कि नवमी तिथि 27 मार्च को दोपहर तक प्रभावी रहेगी. शास्त्रों में ‘उदया तिथि’ और मध्याह्न काल (दोपहर का समय) की व्याप्ति को विशेष महत्व दिया गया है. चूँकि भगवान श्री राम का जन्म दोपहर 12:00 बजे हुआ था और उस समय नवमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए धार्मिक और शास्त्रीय दृष्टि से 27 मार्च ही सबसे उपयुक्त और शास्त्रसम्मत तिथि है.
पुनर्वसु नक्षत्र का दुर्लभ और शुभ संयोग…
इस वर्ष की रामनवमी केवल तिथि के कारण ही नहीं, बल्कि नक्षत्रों के विशेष मेल के कारण भी अत्यंत फलदायी होने वाली है. पंडित प्रवीण शर्मा ने बताया कि इस बार पुनर्वसु नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है. गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में भी वर्णन किया है कि प्रभु का अवतार इसी नक्षत्र में हुआ था. ज्योतिषीय दृष्टिकोण से पुनर्वसु नक्षत्र में की गई पूजा, दान और अनुष्ठान अक्षय पुण्य प्रदान करते हैं. यह संयोग श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का एक स्वर्णिम अवसर है।
नवमी तिथि मधु मास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता.
मध्यदिवस अति सीत न घामा, पावन काल लोक विश्रामा॥
मठ-मंदिरों में जन्मोत्सव की गूंज
27 मार्च को दोपहर ठीक 12:00 बजे अयोध्या के कनक भवन, राम जन्मभूमि मंदिर और अन्य प्रमुख सिद्ध पीठों में शंखध्वनि और घंटों की थाप के साथ प्रभु का प्राकट्य उत्सव मनाया जाएगा. वैदिक मंत्रोच्चार और ‘भय प्रकट कृपाला’ के भजनों से पूरी अयोध्या नगरी गुंजायमान होगी. पंडितों का मानना है कि ग्रहों की यह स्थिति वैसी ही सुखद है जैसी त्रेतायुग में प्रभु के अवतार के समय थी.
श्रद्धालुओं के लिए विशेष परामर्श…
ज्योतिषियों और धर्मगुरुओं ने अपील की है कि सभी भक्त भ्रम का त्याग कर 27 मार्च को ही रामनवमी का पर्व मनाएं. इसी दिन घरों और मंदिरों में भगवान का अभिषेक, पूजन और कन्या पूजन करना सर्वोत्तम रहेगा. पंचांग और परंपरा दोनों के मेल से यह दिन धर्मपरायण जनता के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगा.
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