जेडी न्यूज विजन….
अयोध्या : : यहां राजघाट में आयोजित लक्ष्मी नारायण महायज्ञ अग्निकांड के बाद फायर ब्रिगेड ने भले ही आग बुझा दी है, लेकिन इस घटना के बाद बयानों और सवालों की आग अभी भी सुलग रही है. हादसे के बाद जहां एक तरफ व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आयोजकों के बयानों ने विवाद को और हवा दे दी है।
दरअसल, रामनगरी अयोध्या में आयोजित लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के दौरान 28 मार्च को पूर्णाहुति के समय भीषण आग भड़क उठी. आग इतनी तेजी से फैली कि मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और हजारों श्रद्धालुओं की जान पर बन आई. वहीं, हादसे की खबर पर प्रशासन भी तुरंत सक्रिय हो गया.
आयोजकों का गैर-जिम्मेदाराना बयान
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब महायज्ञ के मंच से विवादित बयान सामने आया. मुख्य आयोजक जीयर स्वामी की मौजूदगी में यह कहा गया कि यज्ञ संपन्न होने के बाद सफाई होनी थी, लेकिन भगवान शेषावतार रामानुजाचार्य ने अग्नि रूप धारण कर स्वयं यज्ञ की सफाई कर दी.
बयान पर लोगों की तीखी प्रतिक्रिया
अयोजकों की मौजूदगी में दिए गए इस बयान को लेकर अब सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं और लोग इसे गैर-जिम्मेदाराना बता रहे हैं. बता दें कि इस महायज्ञ के मुख्य यजमान प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह थे, और कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए थे. फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है, लेकिन सवाल यही है—इतने बड़े आयोजन में सुरक्षा इंतजामों में चूक क्यों हुई… और क्या इस तरह के बयानों से जिम्मेदारी से बचा जा सकता है?
अग्निकांड में तीन लोगों के झुलसने की संभावना
आपको बता दें कि घटना के बाद जहां प्रशासन और दमकल विभाग की कई गाड़ियां घंटों मशक्कत करती रहीं, तब जाकर आग पर काबू पाया जा सका. हालांकि, सूत्रों का दावा है कि इस अग्निकांड में तीन लोग झुलसे हैं, जिन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. इसके अलावा गौशाला तक आग पहुंचने से लाखों के नुकसान की भी बात सामने आ रही है.
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शिवेंद्र द्विवेदी, अयोध्या….
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