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जेवर एयरपोर्ट का नाम महर्षि दयानंद के नाम पर रखने की उठी मांग
ग्रेटर नोएडा। यहां स्थित ईशान एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में आयोजित एक विशाल आर्य महासम्मेलन में नवनिर्मित जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम महर्षि दयानंद सरस्वती अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट रखने की जोरदार मांग उठी है। आर्यों के इस विशाल महासम्मेलन में पूरे देश के हर कोने से आर्य जन उपस्थित हुए। यह कार्यक्रम आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के सौजन्य से आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि स्वामी दयानंद जी महाराज का विशाल व्यक्तित्व इतिहास में उचित सम्मान और स्थान से वंचित कर दिया गया। आर्य समाज ने कभी भी अधिकारों के लिए अराजकता फैलाने का काम नहीं किया, परंतु जिस प्रकार की उपेक्षा स्वामी महर्षि दयानंद की हुई है, वह अब और सहन नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद जी महाराज ने देश के स्वाधीनता आंदोलन पर चढ़कर अपना योगदान दिया था। आज यदि भारत स्वतंत्र है तो यह स्वामी दयानंद जी की सोच और चिंतन का परिणाम है। उनके साथ कांग्रेस की सरकारों नए पक्षपाती बर्ताव किया। परंतु वर्तमान सरकार से ऐसी अपेक्षा नहीं की जा सकती इसलिए देश के सभी आर्यजनों की भावनाओं का सम्मान करते हुए केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को तुरंत इस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम महर्षि दयानंद एयरपोर्ट रखना चाहिए।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे राष्ट्र निर्माण पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष ठाकुर विक्रम सिंह ने इस अवसर पर कहा कि अब आर्यों को सोना नहीं है बल्कि इस लड़ाई को जीत कर ही दम लेना है। उन्होंने कहा कि इस समय प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आर्य समाज की इस मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और यथाशीघ्र जेवर एयरपोर्ट का नाम महर्षि दयानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ पाने के लिए क्रांति का मार्ग अपनाना ही पड़ता है।

संरक्षक मंडल के सदस्य श्री देवेंद्र सिंह आर्य ने इस अवसर पर कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के 28 जिलों सहित 12 प्रांतों की आर्य प्रतिनिधि सभाओं के साथ-साथ नेपाल, मॉरीशस जैसे कई देशों से भी जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम महर्षि दयानन्द अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखने के लिए समर्थन पत्र प्राप्त हुए।
उन्होंने मॉरीशस आर्य सभा द्वारा भेजे गए समर्थन पत्र का वाचन किया और कहा कि यह ऐतिहासिक सम्मेलन जिले और प्रदेश की तो बात छोड़िए देश की सीमाओं को भी लांघकर अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्राप्त कर चुका है। जिससे पता चलता है कि संसार भर के आर्यजन इस बिंदु पर एकमत हैं ।
डॉ डीके गर्ग ने कहा कि सैकड़ो की संख्या में मिले समर्थन पत्रों के आधार पर इस कार्यक्रम को आर्य समाज के राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम के संदर्भ में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्य समाज को भाषण और लेखन दोनों के माध्यम से ही मोर्चा संभालना पड़ेगा। आर्यों का जागरण अब अंतिम परिणाम पर ही जाकर रुकेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता पहलवान पूरन सिंह आर्य द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर जिस प्रकार इतिहास रच रही है, उसका निश्चय ही सकारात्मक परिणाम हमको देखने को मिलेगा। डॉ धर्मप्रकाश आर्य ने अपने ओजस्वी भाषण में कहा कि अभी तो आर्यों ने आगाज दिया है अब इस चिंगारी को पूरे देश में फैलाना हम सब का काम है । उन्होंने कहा कि आर्य समाज राष्ट्रवादी चिंतन धारा को प्रोत्साहित करने वाली एक विचारधारा का नाम है। हम आज भी अपने इस पवित्र कार्य का निष्पादन कर रहे हैं, जब स्वामी दयानंद जी को इतिहास में उनका उचित स्थान सम्मान दिलाने के लिए यह कार्यक्रम कर रहे हैं। अब हमें नगर नगर और गांव-गांव इस प्रकार के आयोजन करने होंगे। जबकि आचार्य कुंवरपाल शास्त्री ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को स्वामी दयानंद जी के विचारों से अवगत कराने के लिए जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम महर्षि दयानंद के नाम से रखा जाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें इस आंदोलन को अब अंतिम परिणति तक पहुंचाना है किसी भी स्थिति में रुकना नहीं है । प्राचार्य गजेंद्र सिंह आर्य ने कहा कि यह कार्य अब से बहुत पहले हो जाना चाहिए था परंतु यदि आज भी इस कार्य को आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया है तो यह भी स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपने अतीत से और आर्य समाज के क्रांतिकारी आंदोलन से शिक्षा लेनी चाहिए। जो पीढ़ी अपनी पिछली पीढ़ी के महान कार्यों को आगे नहीं बढ़ा पाती वह संगठन मर जाता है। आर्य प्रतिनिधि सभा मुरादाबाद सहित कई प्रतिनिधि सभाओं के प्रतिनिधियों ने अपने समर्थन की घोषणा की और आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर को विश्वास दिलाया कि इस आंदोलन में प्रत्येक आर्य प्रतिनिधि सभा उसके साथ खड़ी है।
कार्यक्रम में डॉ राकेश कुमार आर्य की पुस्तक वेद महर्षि दयानंद और भारतीय संविधान, मनुस्मृति और भारतीय संविधान तथा वंदे मातरम पर बवाल क्यों ? का विमोचन भी किया गया। इन पुस्तकों के बारे में डॉ आर्य ने बताया कि मनुस्मृति का भारतीय संविधान ही नहीं बल्कि संसार के सभी संविधानों पर व्यापक प्रभाव है। उन्होंने कहा कि भारत की स्वाधीनता के आंदोलन के दौरान वंदे मातरम हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक बन गया था। जिस पर किसी भी प्रकार का बवाल करना राष्ट्रीयता के साथ छल करना होता है।
महात्मा जितेंद्र भाटिया ने लोगों का आवाहन किया कि कुछ करने के लिए अब समर्पण के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है। श्री भाटिया ने कहा कि एमडीएच परिवार जहां भी स्वामी दयानंद जी का नाम जुड़ जाता है वहीं अपने आप को पूरी निष्ठा के साथ जोड़ लेता है। यदि इस कार्यक्रम और आंदोलन में स्वामी दयानंद जी का नाम जुड़ा है तो समझिए कि एमडीएच का नाम अपने आप जुड़ गया। उन्होंने कहा कि अजमेर में सत्य स्थल का निर्माण करने में एमडीएच परिवार ने अपनी पूरी निष्ठा का परिचय दिया है जिसका भव्य उद्घाटन अगले दो महीने के भीतर होना है।
भाषा प्रचारिणी सभा के जिलाध्यक्ष ब्रह्मचारी आर्य सागर ने कहा कि इतिहास बनाने के लिए कुछ क्रांतिकारी कदम उठाने का समय आ गया है ,जिससे अब पीछे नहीं हटा जा सकता। उन्होंने आर्य समाज के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आर्यों ने राष्ट्र जागरण का पवित्र कार्य कर राष्ट्र की स्वाधीनता में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद जी का जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने वेदों की ओर लौटने का आवाहन किया और जब लोग लोगों ने वेदों की ओर लौट कर देखा तो उनकी आंखें खुल गईं और वे स्वाधीनता के लिए उठ खड़े हुए।
इस कार्यक्रम में जनपद गौतम बुध नगर की सारी टीम बड़ी मेहनत के साथ जुटी रही । जिसका परिणाम यह रहा कि कार्यक्रम में गौतम बुध नगर से अलग अमरोहा, गाजियाबाद , बागपत, सहारनपुर ,मुजफ्फरनगर, अलीगढ़ बुलंदशहर, मुरादाबाद , बरेली, फरीदाबाद, पानीपत सोनीपत ,दिल्ली, गुड़गांव, हापुड़ जैसे अनेक शहरों व नगरों से लोग पहुंचे। जयपुर से चलकर चंद्रशेखर शर्मा जी व उनके साथी कार्यक्रम में पहुंचे जिन्होंने कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में तन मन धन से अपना सहयोग देने का वचन दिया । गुड़गांव से श्री अनिल नरूला ने भी भविष्य के कार्यक्रमों में तन मन धन से सहयोग देने का वचन दिया ।
इस अवसर पर प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर का कारवां अब चल पड़ा है। इस की ओर प्रदेश और देश के आर्यजनों की दृष्टि गड़ी हुई है। आज आर्य प्रतिनिधि सभा गौतम बुद्ध नगर को पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश की आर्य सभाओं के अनेक पत्र प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त अनेक सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपने समर्थन पत्र प्रदान किए हैं ,जो हमारी एकता और संगठन शक्ति को मिला हुआ पुरस्कार है।
स्वामी वेदानंद सरस्वती जी महाराज ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हमने कोई संकल्प लिया है तो उसे पूरा करके ही रुकना है। हमें पूरा विश्वास है कि हम जिस दिशा में बढ़ रहे हैं उसमें सफलता एक दिन निश्चित ही हमारे चरण चूमेगी। आर्य जगत के सुप्रसिद्ध विद्वान राजकुमार शास्त्री ने कहां की स्वामी दयानंद जी का संघर्षपूर्ण जीवन हमें आज भी बहुत कुछ करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने अत्यंत विषम परिस्थितियों में अपने काल में लोगों को जगाकर राष्ट्र सेवा धर्म सेवा के कार्य में लगाया था। आज भी हमें इसी प्रकार का कार्य करना होगा । तभी हम भारत को दूसरी आजादी दिलाने में सफल हो पाएंगे। इस अवसर पर अनेक सामाजिक संगठनों के समर्थन पत्रों का भी वाचन किया गया। लगभग 350 समर्थन पत्र आर्य प्रतिनिधि सभा गौतम बुद्ध नगर को प्राप्त हुए, जो कि बहुत संक्षिप्त काल में मिली हुई एक शानदार उपलब्धि है।
वरिष्ठ अधिवक्ता और बार एसोसिएशन जनपद गौतम बुद्ध नगर के पूर्व महासचिव सरदार सिंह बंसल एडवोकेट ने इस अवसर पर बार एसोसिएशन गौतम बुद्ध नगर के समर्थन पत्र को पढ़कर सुनाया और विश्वास चलाया कि हमारे वर्तमान बार एसोसिएशन इस आंदोलन का समर्थन करती है।
इस अवसर पर रंगीलाल आर्य, देवमुनि जी महाराज, सरपंच रामेश्वर सिंह, डॉ करण सिंह, महेंद्र सिंह आर्य,आर्य वीरेश भाटी ,विजेंद्र सिंह आर्य, कमल सिंह आर्य, ओमवीर सिंह भाटी, चमन शास्त्री, महेंद्र सिंह आर्य, महावीर सिंह आर्य , बलबीर सिंह आर्य, किशन लाल आर्य, हेमसिंह आर्य, विजय सिंह आर्य, गजराज सिंह, हेम सिंह आर्य, ओमप्रकाश आर्य, जलजीत सिंह, सुदेश कुमार आर्य, जितेंद्र कुमार आर्य, वेद प्रकाश आर्य, सुनील आर्य, शिवमुनि जी, माता भगवती, संजू आर्या, रीता आर्या, सरदार सिंह बंसल एडवोकेट, रविंद्र सिंह बंसल एडवोकेट डॉ राजेंद्र सिंह, जितेंद्र कुमार आर्य, प्रधान टीकम सिंह, राजीव विकल, अजय आर्य एडवोकेट, राकेश आर्य बागपत, श्री कृष्ण शास्त्री, मांगेराम आर्य, नागेश कुमार आर्य, बाबूराम आर्य, राजेंद्र सिंह आर्य आदि सहित बड़ी संख्या में आर्यजन उपस्थित रहे।
ज्ञात रहे कि आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर पिछले कई वर्ष से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम महर्षि दयानंद जी के नाम पर रखने की मांग करती चली आई है। कितने ही ज्ञापन और कितने ही प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों के लिए दिए गए हैं, परंतु उन पर कोई भी कार्यवाही नहीं हुई है। इसलिए अब यह विशाल आर्य महासम्मेलन आयोजित कर आंदोलन का स्वरूप तैयार किया गया है।
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