जेडी न्यूज विजन….
सन्तोष कुमार गुप्ता….
गोरखपुर ——–गगहा थाना क्षेत्र के गजपुर बाजार में हुए भीषण अग्निकांड को पांच दिन बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता बरकरार है। आग की लपटों ने न केवल पीड़ित परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए, बल्कि उनके जीवन भर की कमाई को भी राख के ढेर में तब्दील कर दिया। विडंबना यह है कि इस त्रासदी के बाद अब तक कोई भी जनप्रतिनिधि या बड़ा प्रशासनिक अधिकारी पीड़ितों के आंसू पोंछने मौके पर नहीं पहुँचा है।
*मदद की आस में थकी आँखें*
हादसे के बाद से ही पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे दाने-दाने को मोहताज हैं। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय घर-घर दस्तक देने वाले नेता आज संकट की इस घड़ी में नदारद हैं। पीड़ित (अम्बिका चौरसिया) ने सिसकते हुए बताया,
*”सब कुछ जलकर खाक हो गया, तन पर सिर्फ यही कपड़े बचे हैं। वोट मांगने तो सब आते हैं, लेकिन आज जब हम बर्बाद हो गए हैं, तो कोई हाल पूछने वाला भी नहीं है।”*
*प्रशासनिक सुस्ती पर आक्रोश*
केवल जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि तहसील प्रशासन के रवैये को लेकर भी स्थानीय लोगों में भारी रोष है। आग बुझने के बाद से अब तक नुकसान का आकलन (सर्वे) करने के लिए भी कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची है। लोगों का कहना है कि सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गरीब की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
*नेताओं की बेरुखी:** घटना के पांच दिन बाद भी किसी विधायक या सांसद का दौरा नहीं।
*राहत का अभाव:* खाने-पीने और रहने की कोई सरकारी व्यवस्था अब तक नहीं की गई।
*जनता की मांग:**पीड़ितों ने तत्काल मुआवजे और पुनर्वास की गुहार लगाई है।
स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने सुध नहीं ली, तो वे तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि सोता हुआ प्रशासन और ‘माननीय’ कब जागते हैं।
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