जेडी न्यूज़ विज़न….
पुरानी पीढ़ी के कितने ही लोग अभी हमारे बीच हैं जो यह भली प्रकार जानते हैं कि 1965 में पैदा हुए अन्न संकट के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने जब देश के स्वाभिमान की रक्षा के दृष्टिगत लोगों से अपील की कि वे सभी सप्ताह में एक दिन का व्रत रखें और अपने घरों की छतों पर भी सब्जियां उगाएं तो उसका बहुत सकारात्मक प्रभाव लोगों के मन मस्तिष्क पर पड़ा था।
अब हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वैश्विक ईंधन संकट से निपटने के लिए अपने आप से ही एक नई पहल की है। प्रधानमंत्री ने अपने 10-15 गाड़ियों के सामान्य काफिले में अप्रत्याशित कटौती करते हुए उसे मात्र दो गाड़ियों तक सीमित कर दिया है। ऐसा करके प्रधानमंत्री ने संदेश दिया है कि हमें फिजूलखर्ची से बचना चाहिए और राष्ट्रीय हितों को दृष्टिगत रखते हुए मितव्ययिता से काम लेना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने के लिए एसपीजी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत की गई उपरोक्त मिसाल के पश्चात उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी गाड़ियों की संख्या 50% कम करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के भाजपा विधायकों को सप्ताह में काम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का भी निर्देश दिया है। अर्थव्यवस्था के समक्ष उपस्थित संकट को देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित अन्य प्रदेशों के भाजपा मुख्यमंत्रियों ने भी प्रधानमंत्री की पहल का अनुसरण करने का निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम करने की योजना पर भी काम करने की घोषणा की गई है।
हमें यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि आज के समय में वैश्विक संबंध इस प्रकार के बन चुके हैं कि किसी भी देश पर आया आर्थिक संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित करता है। युद्ध जैसी स्थिति से अब एक देश प्रभावित नहीं होता बल्कि उससे कई देश प्रभावित होते हैं। ईरान और इजरायल के मध्य चला वर्तमान युद्ध विश्व की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही घातक सिद्ध हुआ है। इस प्रकार के संकट में देशवासियों का भी कर्तव्य होता है कि वह सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करें। किसी भी स्वाभिमानी राष्ट्र के लिए यह आवश्यक है कि संकट की किसी भी परिस्थिति में देश की सरकार और देशवासियों के मध्य बेहतर समन्वय बना रहना चाहिए। सरकार केवल जनप्रतिनिधियों के चुने जाने से नहीं बनती है, देशवासी भी सरकार का एक आवश्यक अंग होते हैं। सरकार का अर्थ एक व्यवस्था से है। एक सिस्टम से है। वह व्यवस्था अथवा सिस्टम ऊपरी तौर पर तो लगता है कि देश के नागरिकों के लिए काम करता है, परंतु देश के नागरिक भी उस सिस्टम को अथवा व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखने के अपने कर्तव्य को जब समझ लेते हैं तो सरकार दौड़ने लगती है। इसलिए देशवासियों को भी अपने आप को सरकार का एक अंग मानकर अपने कर्तव्यों की पहचान होनी चाहिए।
ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट से बचने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देशवासियों से एक वर्ष तक सोना न खरीदने और विदेश यात्राओं पर खर्च कम करने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपनी इस अपील के माध्यम से लोगों को स्वदेशी के प्रति जागरूक करने का काम किया। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर प्राकृतिक खेती को अपनाने पर भी सरकार जोर दे रही है।
अब विचार करने की आवश्यकता है कि यदि हम एक वर्ष के लिए सोना खरीदना बंद कर देते हैं तो इसका लाभ क्या होगा ? यदि हम ऐसा करते हैं तो आयात के रुक जाने से 1 वर्ष के भीतर ही हम 70 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा बाहर जाने से बचाने में सफल हो सकते हैं। यदि भारत के लोग अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप एक वर्ष के लिए सोना आयात आधा करते हैं तो भी हमको 35 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बचाने में सफलता मिल सकती है।
इसी प्रकार विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि हम एक वर्ष के लिए तेल आयात में 20% कटौती करने में भी सफल हो जाते हैं तो हमें लगभग 32 अरब डालर तक विदेशी मुद्रा बचाने में सफलता मिल सकती है। जबकि खाद्य तेल में 20% कटौती करने पर हम चार अरब डॉलर विदेशी मुद्रा बचा सकते हैं। इन तथ्यों से स्पष्ट होता है कि यदि हम देश के लोग थोड़ी सी भी इच्छा शक्ति बनाकर आगे बढ़ने का निर्णय लेते हैं तो देश की अर्थव्यवस्था के लिए यह बहुत ही उत्तम रहेगा। हम दो कदम चलेंगे तो चार कदम का लाभ होगा। यह बहुत ही सस्ता सौदा है। यह भी एक बहुत ही अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री ने देश के सामने खड़े खतरे से देश के लोगों को अवगत करा दिया है। प्रधानमंत्री की इस पहल को सकारात्मक दृष्टिकोण से लेने की आवश्यकता है। देश विकास की जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, वह हम सबके लिए गर्व का विषय है। बहुत ही शुभ संयोग है जब देश को गडकरी के रूप में सड़क परिवहन के क्षेत्र में एक अच्छा मंत्री मिला है। विदेश मंत्री के रूप में भी हमें एस जयशंकर एक अच्छे विदेश मंत्री मिले हैं। इसी प्रकार कई ऐसे मंत्री हैं जो केवल अपने काम पर दृष्टि रखते हैं। उन्हें अखबार में छपने की आवश्यकता नहीं होती।
इस प्रकार सरकार में बैठे ऐसे निस्पृह लोग गीता में दिए गए भगवान श्री कृष्ण जी के निष्काम कर्म योग के उपदेश को आत्मसात कर चुके लगते हैं। गीता के इस निष्काम कर्म योग को हम सभी भारतवासी बहुत सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। उसे समझने का भी प्रयास करते हैं,परंतु अब तो उसे अंगीकार करने का समय आ गया है। देश के विकास को किसी प्रकार की नजर नहीं लगनी चाहिए । इससे पहले कि कुछ भी अशुभ हो, हम सभी ‘एक दृष्टि – नेक दृष्टि ‘ को अपनाकर एक ही दिशा में, एक ही सोच के साथ एक ही नेतृत्व के मार्गदर्शन में आगे बढ़ने का निर्णय लें। हमारी नियति हमें पुकार रही है। नियति के प्रति बदनीयती की सोच रखने वाले लोगों को हमें हाशिये पर धकेलना होगा। हमें यह दिखाना होगा कि हम अपनी सरकार के साथ खड़े हैं। हमने जिस परिश्रम और पुरुषार्थ के साथ वर्तमान वैश्विक राजनीति में अपना स्थान बनाया है, उससे एक इंच भी पीछे हटना हमें स्वीकार नहीं है। इसके लिए विपक्ष द्वारा फैलाये जा रहे भ्रमजाल में फंसकर अपने देश का अहित नहीं करना है।
(डॉ राकेश कुमार आर्य)
( लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं )
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