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नेपाल में ‘Gen-Z’ की जीत! RSP को मिला प्रचंड बहुमत… रैपर बालेन शाह बनेंगे नए पीएम?

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नेपाल की राजनीति में एक नए युग का उदय हुआ इसी के साथ इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले साल हुए ‘Gen-Z’ विरोध प्रदर्शनों के बाद हुए पहले आम चुनाव में रैपर से राजनेता बने बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ती दिख रही है।

ताजा रुझानों के मुताबिक 275 सदस्यीय संसद के लिए हुए चुनाव में प्रत्यक्ष चुनाव की 165 सीटों में से शुक्रवार देर रात तक RSP 115 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।

ऐसे में 35 वर्षीय इंजीनियर-रैपर बालेंद्र शाह और पूर्व काठमांडू मेयर बालेन शाह नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। जहां एक ओर RSP प्रचंड बहुमत की तरफ तेजी से बढ़ रही है, वहीं नेपाल की पारंपरिक और लंबे समय तक सत्ता में रही पार्टियां नेपाली कांग्रेस और CPN-UML इस चुनाव में बुरी तरह पिछड़ती नजर आ रही हैं। शुरुआती रुझानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि मतदाताओं ने इन पुराने दलों को लगभग हाशिए पर धकेल दिया है।

Nepal Election Results में ओली के अभेद्य किले झापा-5 में बालेन की बड़ी सेंध

इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला परिणाम झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से आया है, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का ‘अजेय’ गढ़ माना जाता था। सबसे चौंकाने वाला नतीजा झापा-5 सीट से सामने आया है, जो पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का मजबूत गढ़ माना जाता था। यहां बालेन शाह ने बड़ी बढ़त बना ली है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार शाह को 15,169 वोट मिले, जबकि ओली को केवल 3,344 वोट ही हासिल हो पाए। इस नतीजे ने नेपाल की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है कि जनता खासकर युवा मतदाता अब पारंपरिक नेताओं से आगे बढ़कर नए चेहरों को मौका दे रहे हैं।

Balendra Shah Prime Minister Nepal: शुरूआती रुझानों में RSP की ‘क्लीन स्वीप’

राजधानी काठमांडू में भी RSP को बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। काठमांडू-1 सीट से RSP की उम्मीदवार रंजु दर्शन ने 15,455 वोटों के साथ जीत दर्ज की, जबकि अन्य कई सीटों पर भी पार्टी के उम्मीदवार मजबूत स्थिति में हैं। वहीं काठमांडू-3 से राजू नाथ पांडे ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कुलमान घिसिंग को 7,586 वोटों के अंतर से हराकर प्रतिनिधि सभा में जगह बनाई।

 

हालांकि कुछ पुराने दिग्गज नेताओं ने भी अपनी सीटें बचाई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने रुकुम ईस्ट सीट से लगातार पांचवीं बार जीत दर्ज की है, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ अभी भी बरकरार मानी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि बालेन शाह की लोकप्रियता के पीछे उनका काठमांडू के मेयर के रूप में काम और युवाओं के साथ सीधा संवाद बड़ी वजह है।

Nepal Gen-Z protest Impact: सितंबर में सोशल मीडिया बैन प्रोटेस्ट से मतपेटी तक युवाओं का असर

बलेन शाह की इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे उनकी अनूठी रणनीति रही है। शाह पारंपरिक मीडिया से दूरी बनाए रखते हुए सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से सीधे जुड़ते रहे हैं, जिससे उन्हें खासकर Gen-Z मतदाताओं का भारी समर्थन मिला। RSP के चुनावी घोषणापत्र में भी युवाओं और रोजगार पर खास जोर दिया गया है। पार्टी ने 12 लाख नई नौकरियां पैदा करने और मजबूरन होने वाले विदेश पलायन को कम करने का वादा किया है। बेरोजगारी और कम वेतन से परेशान युवाओं में यह वादा काफी लोकप्रिय हुआ है।

दरअसल यह चुनाव पिछले साल सितंबर में हुए Gen-Z विरोध प्रदर्शनों के बाद कराया गया है। 8 और 9 सितंबर को हुए बड़े प्रदर्शनों ने उस समय के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार पर भारी दबाव बना दिया था। अंत में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और 12 सितंबर को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रतिनिधि सभा भंग कर दी, जिसके बाद नए चुनाव कराए गए।

नेपाल के लिए नई सुबह की किरण

नेपाल की प्रतिनिधि सभा की कुल 275 सीटों के लिए चुनाव हुए हैं इनमें से 165 सीटें प्रत्यक्ष चुनाव FPTP प्रणाली के जरिए भरी जाती हैं, जबकि 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत पार्टियों को उनके कुल वोट शेयर के आधार पर मिलती हैं। अगर मौजूदा रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो नेपाल की राजनीति में यह एक ऐतिहासिक बदलाव होगा। पहली बार कोई नई और युवा नेतृत्व वाली पार्टी इतनी बड़ी ताकत के रूप में उभर सकती है, जिससे देश की राजनीतिक दिशा और नीतियों पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।

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