जेडी न्यूज विजन…
_ये दो कहानियां पढ़ लीजिए, घर से नोच कर फेंक देंगे कैमरे…
आप को क्या लगा आपके घर में लगे सीसीटीवी कैमरे आपकी सेफ्टी के लिए हैं? आप इन सीसीटीवी कैमरों से पीठ पीछे घर में चल रही गतिविधियों और अनहोनियों का समय रहते पता लगा सकते हैं।
तो आप यह भी जान लीजिए कि यही सीसीटीवी कैमरे आपकी निजी जिंदगी में भूचाल भी ला सकते हैं. जी हां, हाल ही में दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे ही मामले का खुलासा किया है, जिसमें कुल आठ लोगों को अभी तक गिरफ्तार किया जा चुका है. ये आठों लोग पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के कहने पर जगह-जगह सोलर पैनल वाले सीसीटीवी कैमरे लगाते थे. फिर उनसे मिलने वाली फीड को पाकिस्तान भेज देते थे.
गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने ये सीसीटीवी कैमरे कई हाइपर सेंसिटिव एरिया में लगाए थे, जिसमें भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के ठिकाने भी शामिल हैं. यह तो बात रही घर के बाहर की. यदि घर के अंदर की बात करें तो कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें हैकर्स ने इंटरनेट से जुड़े सीसीटीवी कैमरों को हैक कर घर के भीतर चल रही निजी गतिविधियों को रिकॉर्ड कर लिया. इन निजी गतिविधियों में पति-पत्नी के निजी पल, महिलाओं की नग्न वीडियो सहित कई निजी पलों को रिकार्ड किया था. बाद में, इन सीसीटीवी फुटेज को सोशल मीडिया साइट पर कौडि़यों के भाव बेच दिया था. ऐसे मामलों में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी। है।
गुजरात से सीसीटीवी कैमरों की हैकिंग की कहानी
- यह मामला 2025 का है. पुलिस को पता चला कि यूट्यूब पर राजकोट के एक मैटरनिटी हॉस्पिटल की कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं. इन वीडियों में गर्भवती महिलाओं की मेडिकल जांच और इंजेक्शन लगाने के सीन दिख रहे थे.
- जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि यह कोई छोटा-मोटा हैक नहीं, बल्कि पूरे देश में फैला एक बड़ा साइबर क्राइम रैकेट था. हैकर्स ने कमजोर और डिफॉल्ट पासवर्ड का फायदा उठाते हुए एक वेबसाइट से आईपी एड्रेस निकाल लिए थे.
- इसके बाद एक दूसरे टूल से पोर्ट स्कैन किए और ब्रूट-फोर्स अटैक से पासवर्ड क्रैक कर लिए. एक बार सिस्टम में घुसने के बाद ये हैकर घर के भीतर हो रही हर गतिविधि की लाइव फुटेज देख और डाउनलोड कर सकते थे.
- गिरफ्तारी के बाद इनके कब्जे से करीब 50,000 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज बरामद की गईं. इन फुटेज को गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, यूपी सहित 20 राज्यों से हासिल किया गया था. इनमें अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, फैक्ट्री, सिनेमा हॉल और प्राइवेट अपार्टमेंट शामिल थे.
- पूछताछ के दौरान, पुलिस को यह भी पता चला कि इन सीसीटीवी फुटेज को सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर बेचा जा रहा था. साइट्स पर छोटे क्लिप डाले जाते थे, जिनमें टेलीग्राम ग्रुप का लिंक होता था. वहां लंबी वीडियो 800 से 2,000 रुपये में बिकती थीं.
- कुछ चैनल लाइव फीड का सब्सक्रिप्शन भी ऑफर करते थे. फरवरी 2025 तक पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था. इनमें 4 महाराष्ट्र से और बाकी उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली और उत्तराखंड से थे.

बांद्रा में यूट्यूबर का घर सीसीटीवी हुआ हैक
- नवंबर 2023 की 17 तारीख को मुंबई के बांद्रा वेस्ट में एक 21 वर्षीय यूट्यूबर ने अपने घर में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए थे. एक कैमरा उसके बेडरूम में भी था. एक दिन किसी अनजान शख्स ने बेडरूम में लगे सीसीटीवी कैमरे का एक्सेस हासिल कर लिया.
- हैकर ने बिना किसी को बताए वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें यूट्यूबर बाथरूम से बाहर निकलते दिख रहे थे. परिवार के अन्य सदस्य भी उस वीडियो में नजर आ रहे थे. 9 दिसंबर 2023 को यूट्यूबर को अपने दो दोस्तों के फोन आए.
- उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. यूट्यूबर ने खुद देखा तो उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. वीडियो इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर फैल चुका था. उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत दर्ज कराई.
- अपनी शिकायत में उन्होंने बताया कि अनजान व्यक्ति ने मेरे बेडरूम में लगे सीसीटीवी कैमरे का एक्सेस हासिल कर लिया है. वीडियो इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.
- 11 दिसंबर 2023 को बांद्रा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई. साइबर टीम ने आईपी एड्रेस ट्रैकिंग शुरू की और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से वीडियो हटाने का रिक्वेस्ट भेजा. लीक हुई इन वीडियो में यूट्यूबर की बहन और मां के निजी पलों की फुटेज भी थी.

q]पुराने और आज के जमाने के सीसीटीवी कैमरों में क्या अंतर है?[/q] [ans]पुराने जमाने के सीसीटीवी कैमरे बहुत साधारण थे. उनमें वीडियो लोकल डीवीआर या एनवीआर नाम के छोटे बॉक्स में सेव होता था. लेकिन आज का सीसीटीवी ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (IoT) टेक्नोलॉजी पर चलता है. खासकर सोलर-पावर्ड वायरलेस कैमरे, जैसे दिल्ली पुलिस ने हाल में पकड़े हैं.[/ans] [q]नए सीसीटीवी कैमरा असल में किस तरह से काम करते हैं?[/q] [ans]ये कैमरे पूरी तरह से वायरलेस होते हैं. इनके ऊपर छोटा सा सोलर पैनल लगा होता है. दिन में सूरज की रोशनी से बैटरी चार्ज हो जाती है. एक बार चार्ज हो जाने पर यह 24 घंटे चलता रहता है. कैमरे में 4G या 5G सिम कार्ड लगता है. सिम से इंटरनेट कनेक्शन मिलता है. कैमरा वीडियो कैप्चर करता है. इसमें लेंस, सेंसर, माइक्रोफोन सब होता है. वीडियो ऑटोमैटिक कंप्रेस हो जाता है, ताकि इंटरनेट पर आसानी से जा सके. फिर इसे क्लाउड स्टोरेज या पीयर टू पीयर टेक्नोलॉजी से भेज दिया जाता है.[/ans] [q]इंटरनेट से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे कंपनी के सर्वर से कैसे जुड़ते हैं?[/q] [ans]आज आप कोई भी सीसीटीवी कैमरा खरीदें, सभी कैमरे क्लाउड बेस्ड् होते हैं. पूरा वीडियो या लाइव फीड कंपनी के सर्वर पर जाता है. कैमरा ऑन होते ही कंपनी के सर्वर से ‘हैलो’ कहता है. हर कैमरे में एक यूनिक आईडी और पासवर्ड होता है. कैमरा कंपनी के क्लाउड सर्वर जुड़ जाता है. ज्यादातर चीनी कंपनियां अपने सर्वर चीन में रखती हैं या क्लाउड में रखती हैं. भारतीय ब्रांड भी कभी-कभी विदेशी क्लाउड इस्तेमाल करते हैं. सर्वर पर वीडियो स्टोर होता है. कई बार फुटेज इन सर्वर से भी लीक हो जाती हैं.[/ans] [q]सीसीटीवी का फीड आपके मोबाइल तक कैसे पहुंचता है और बीच में खेल होने की क्या गुंजाइश है?[/q] [ans]साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, सीसीटीवी कैमरों से फीड इंटरनेट की मदद से कंपनी के सर्वर में जाता है. इसके बाद, वहां से आपके फोन पर आता है. सीसीटीवी फुटेज देखने के लिए आपको खास ऐप की जरूरत होती है. कई बार यही एप आपके मोबाइल में मौजूद सभी पर्सनल डाटा चोरी कर कंपनी के सर्वर में पहुंचा देती हैं. ऐसे में हैकर्स के लिए सीसीटीवी हैक करना और साइबर क्राइम करना बेहद आसान हो जाता है.[/ans]
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