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(सुरेन्द्र कुमार वर्मा)
प्रयागराज : : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले मे किसानों को बडी राहत देते हुए हाईटेंशन लाइन की नीचे पड़ने वाली जमीन का मुआवजा देने का आदेश दिया है शामली के किसानों की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति प्रशात कुमार की खण्ड पीठ ने राज्य सरकार के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशो के अनुसार किसानों को उचित मुआवजा दिया जाना आवश्यक है शामली के चार किसानों जमीन की पर हाईटेंशन टन्स मिशन बिजली लाइन डाली गयी थी टावर लगाने तार खीचने मे उनकी फसल पेड और जमीन की कीमत प्रभावित हुई थी पेड फसल का तो आंशिक मुआवजा दिया गया था लेकिन तारों को नीचे कारिडोर की जमीन का कोई मुआवजा नहीं दिया गया था जिसकी शिकायत किसानों ने कई बार प्रशासन से की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई उसके बाद किसानों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया कोर्ट ने केंद्र सरकार उर्जा मंत्रालय का हवाला देते हुए 15 अक्टूबर 2015 के आदेशों में रो और टावर क्षेत्र के लिए मुआवजा तय किया गया था 14 जून 2024 के नये आदेश में मुआवजा बढ़ा कर टावर बेस क्षेत्र के लिए 200% मूल्य और रो क्षेत्र के लिए 30% मूल्य भूमि कर दिया है कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश इन आदेशों को लागू करने मे चयनात्मक रवैया नहीं अपना सकती राज्य सरकार पुराने आदेश 2015 को लागू कर रही है लेकिन नये 2024 के आदेश को नजरंदाज कर रही है यह रवैया किसानो के खिलाफ है सरकार मनमाने तरीके से मुआवजा देने से इन्कार नहीं कर सकती है कोर्ट ने 10 मार्च 2026 का प्रशासनिक आदेश को रद्द कर दिया और राज्य सरकार को 14 जून 2024 के केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशो के अनुसार 4 हफ्ते के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया है हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हाईटेंशन लाइन के कारण जमीन की उपयोगिता और कीमत में भारी कमी आ जाती है जमीन पर निमार्ण और पेड लगाने व अन्य गतिविधियों पर रोक लग जाती है ऐसे में बैगर जमीन अधिग्रहण किये ही जमीन मालिक के अधिकार प्रभावित होता है इसलिए मुआवजा देना जरूरी है
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