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पिठापुरम: : श्री विश्वविद्यालय विद्या आध्यात्मिक पीठम
के नौंवे पीठाधिपति डॉ. उमर अली शाहने कहा कि बचपन से आध्यात्मिक दर्शन सीखने से बच्चों को भविष्य में अच्छेे नागरिक बनने में मदद मिलेगी।
श्री विश्वविद्यालय विद्या आध्यात्मिक पीठम पिठापुरम के तत्वाधान में शनिवार को दार्शनिक बाल विकास ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर उद्घाटन ज्योति प्रज्वलन कर करने के उपरांत अपने उद्गार व्यक्त करते हुए डॉ. उमर अली शाह ने उक्त बातें कही।

2 से आगामी 9 मई तक विनिश्चित प्रशिक्षण शिविर में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. उमर अली शाह ने कहा कि यदि कोई दार्शनिक बालविकास के माध्यम से प्रशिक्षित हो और समय का उपयोग करके जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करे, तो हर कोई जीवन में उच्च स्थान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस शिविर में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को हर वर्ष पीठम द्वारा आयोजित इस तात्विक बालविकास ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर में ज्ञान, मनोरंजन, नया उत्साह और बहुआयामी विकास मिलता है और वे अपनी शिक्षा में काफी प्रगति कर रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से ग्रीष्मकालीन छुट्टियों को बर्बाद किए बिना अपने कौशल को सामने लाने और समय का सदुपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज की प्रतिस्पर्धा की दुनिया में, व्यक्ति को उच्च महत्वाकांक्षाएं निर्धारित करनी चाहिए और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत के साथ एक ऋषि के रूप में परिपक्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कर्म करने में कई बाधाएं आती हैं, जबकि बुरे कर्म करना बहुत आसान है। लेकिन दार्शनिक बालविकास अच्छे गुणों को विकसित करने और दार्शनिक ज्ञान के साथ बेहतर नागरिक बनने में मदद करता है।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उमर अली शाह पब्लिक स्कूल के करेस्पांडेंट डॉ. हुसैन शाह ने कहा कि जिस तरह एक मूर्तिकार पत्थर को तराशकर मूर्ति का आकार देता है, उसी तरह शिक्षक छात्रों के अंदर से बुरे गुणों को दूर कर उन्हें महान शिक्षाविद् बनाते हैं । उन्होंने कहा कि यह स्थिति दार्शनिक बालविकास के माध्यम से ही पैदा होता है। एक अन्य अतिथि हस्तलेखन विशेषज्ञ श्री के.वी. एस.एस.एन. प्रसाद ने कहा कि इस पीठ द्वारा ग्रीष्मकालीन शिविर बहुत ही आधुनिक शैली में आयोजित किया जाते हैं और बच्चों के आंतरिक ज्ञान को बाहर लाने के लिए कई कार्यक्रम तैयार किए जाते हैं।
एक अन्य अतिथि सेवानिवृत्त प्राचार्य श्री पेंदा श्रीनिवास राव ने गुरु की विशिष्टता के बारे में बताया। सेवानिवृत्त तेलुगु पंडित श्री ताटवर्ती सुब्बाराव ने एक अनूठी कविता सुनाई और इसकी व्याख्या की। पीठ के संयोजक श्री पेरुरी सूरीबाबू ने कहा कि पीठ द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में बालविकास प्रमुख हैं और उन्होंने कहा कि शिक्षा का स्थान अद्वितीय है।
बाला विकास बच्चों द्वारा प्रस्तुत गीत से प्रारंभ हुई सभा में प्रशिक्षण शिविर के आयोजक श्री ए.वी.वी. सत्यनारायण ने आठ दिनों तक प्रशिक्षण शिविर में होने वाली गतिविधियों के बारे में बताया, जबकि अवधानी श्री यर्रमशेट्टी उमामहेश्वर राव ने प्रशिक्षण शिविर के आयोजन की जरूरत पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में 130 बच्चों, उनके माता-पिता, 20 गुरुओं, 20 प्रशिक्षकों, श्री एमआरके राजू,श्री एम. सत्यनारायण, श्री रेका प्रकाश और अन्य पीठम के सदस्यों ने भाग लिया।
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