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॥ श्री रामजन्मोत्सव: मर्यादा पुरुषोत्तम ॥
भय भंजन, मन रंजन, छबि अति मनोहारी,
कौशल्या-नंदन राम पर, हम सब बलिहारी।
मुनि-जन मुदित, देव हर्षित, जन-जन का कल्याण हुआ,
धरा हुई पावन जब, प्रभु का शुभ अवतरण हुआ।
दशरथ के नन्दन चारों, जग के उजियारे हैं,
राम, लखन, भरत, शत्रुघ्न, सबको प्राणों से प्यारे हैं।
बाल-क्रीड़ा देख मात-पिता का, मन हर्षित हो जाता,
इनकी दिव्य आभा से, सारा जग आलोकित हो जाता।
विश्वामित्र संग सिधारे, असुरों का संहार किया,
अहिल्या का उद्धार कर, भक्त का मान बढ़ा दिया।
बाली का संहार कर, सुग्रीव को दिया अभय दान,
किष्किंधा में फिर गूँजा, धर्म और न्याय का नाम।
हनुमत बने दूत जब, सीता माँ की सुध लाये,
वानर सेना संग सिंधु पर, अद्भुत सेतु बनाये।
भीषण रण में रावण हारा, मान दनुज का चूर हुआ,
विभीषण का राजतिलक, अधर्म का अंत ज़रूर हुआ।
लौटे जब अवध धाम, दीपों से जगमगाया आकाश,
मर्यादा पुरुषोत्तम ने फैलाया, चारों ओर प्रकाश।
सुर-मुनि-गंधर्व गाते, जिनके गुणों की गाथा अविराम,
कोटि-कोटि वन्दन चरणों में, जय-जय राजा राम!
॥ विशेष शुभकामनाएँ ॥
चैत्र मास की शुक्ल नवमी, मंगल गान सुनाती है,
अयोध्या की गलियों में, खुशियाँ उमड़ी आती हैं।
सजे आरती, बजे शंख, हर घर में हो उजियारा,
राम नाम की शक्ति से, मिटे अंधेरा सारा।
रामनवमी की अनंत शुभकामनाएँ!
- मदन वर्मा “माणिक”
इन्दौर, मध्य प्रदेश
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